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भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता तय, कांग्रेस बोली-‘हाउडी मोदी’ पर ‘नमस्ते ट्रंप’ भारी, देखें क्या है समझौते का पूरा ब्यौरा

बीते कुछ दिनों से अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा था। दरअसल, ट्रेड डील को लेकर अमेरिका की ओर से निरंतर दबाव बनाया जा रहा था। इतना ही नहीं, रूस से तेल आयात को लेकर भी अमेरिका भारत पर अलग रणनीति के तहत दबाव डाल रहा था। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ का बोझ बढ़ाने की धमकियाँ भी दी जा रही थीं।

हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि इन तमाम मुद्दों पर सहमति बन गई है। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है और इससे जुड़े अहम बिंदु सामने आ गए हैं।

इस संबंध में शुक्रवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और भारत ने शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) का खाका साझा किया है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को सुलझा लिया गया है।

माना जा रहा है कि यह समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और अमेरिका इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू करेंगे और अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसा संतुलित व्यापार समझौता तैयार करना है, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिल सके। इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है।

उधर, कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने शनिवार को दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर जारी संयुक्त बयान से यह साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की तथाकथित ‘गले मिलने वाली कूटनीति’ से भारत को कोई ठोस लाभ नहीं मिला।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि ‘इस पूरे घटनाक्रम में ‘हाउडी मोदी’ पर ‘नमस्ते ट्रंप’ भारी पड़ता नजर आ रहा है। सरकार बड़े आयोजनों और प्रतीकात्मक कूटनीति पर जोर देती रही, लेकिन ठोस राष्ट्रीय हितों को लेकर भारत को अपेक्षित फायदा नहीं मिल सका’।

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अमेरिका-भारत के हाल ही में जारी संयुक्त वक्तव्य में विवरण नहीं दिए गए हैं। लेकिन जो बातें सामने आई हैं, उनसे यह स्पष्ट है कि भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा। अलग से अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि यदि भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है तो 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क फिर से लगाया जा सकता है।”

भारतीय किसानों की कीमत पर होगी अमेरिका की मदद – कांग्रेस

उन्होंने दावा किया कि भारत, भारतीय किसानों की कीमत पर, अमेरिकी किसानों की मदद करने के लिए आयात शुल्क में कटौती करेगा। रमेश ने कहा, “अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात तीन गुना हो जाएगा, जिससे हमारा लंबे समय से चला आ रहा वस्तुओं का व्यापार अधिशेष खत्म हो जाएगा। अमेरिका को भारत की आईटी और अन्य सेवाओं के निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।”

ट्रंप ने हटाया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस फ्रेमवर्क के सामने आने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की घोषणा की थी। इसके लिए उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर भी किए। यह अतिरिक्त टैरिफ भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर लगाया गया था।
ट्रंप का दावा था कि भारत अपने व्यापारिक अवरोधों को कम करेगा और अमेरिका से तेल सहित अन्य उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा। हालांकि, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाए रखा।

30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक भारतीय निर्यात की राह आसान

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस फ्रेमवर्क को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से MSME सेक्टर, किसानों और मछुआरों के लिए अमेरिका जैसे 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले विशाल बाजार के दरवाज़े खुलेंगे।


गोयल के अनुसार, इससे न केवल निर्यात में बढ़ोतरी होगी, बल्कि महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है। इससे वस्त्र और परिधान, चमड़ा व फुटवियर, प्लास्टिक-रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बड़ा लाभ मिलेगा।

कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ शून्य, ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती

अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण तथा विमान के पुर्जों सहित कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति जताई है।

किसानों और डेयरी सेक्टर के हित पूरी तरह सुरक्षित

पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारतीय किसानों और ग्रामीण आजीविका से जुड़े हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है।

वहीं, सोशल मीडिया पर कांग्रेस ने एक ट्वीट के ज़रिए सरकार को घेरते हुए कई अहम सवाल उठाए हैं। ट्वीट में कहा गया है-

अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर जॉइंट स्टेटमेंट आ गया है।

इसे देखकर साफ कहा जा सकता है कि मोदी ने अमेरिका के हाथों देश बेच दिया है।

इस डील से भारत के किसानों, व्यापारियों, उद्योगों को भारी नुकसान होगा।

  • बयान के मुताबिक- अमेरिका हमसे 18% टैरिफ वसूलेगा, जो पहले 3% से कम होता था. भारत अमेरिका से आने वाले सामानों पर टैरिफ हटाएगा या कम करेगा।
  • जैसे- अमेरिका से आने वाले खेती से जुड़े बड़ी संख्या में सामानों पर टैरिफ नहीं लगेगा।
  • अमेरिका के फल, dried distillers’ grains (DDGs), पशु चारा के लिए लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट पर टैरिफ हट जाएगा।
  • भारत इस बात पर भी मान गया है कि अमेरिकी फूड और खेती किसानी के उत्पादों पर नॉन-टैरिफ बैरियर को हटाया जाएगा. मतलब कि भारत अपने बाजार को पूरी तरह अमेरिका के लिए खोल रहा है।
  • इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले खाने पीने के सामान पर भी टैरिफ हट जाएगा।
  • भारत के कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक कैमिकल, घर की सजावट के सामान, कारीगर उत्पाद, मशीनरी, सब पर 18% टैरिफ लगेगा और इसका बहुत नुकसान भारत को होगा।
  • मोदी ने ट्रंप से ये भी करार किया है कि भारत अगले 5 साल में 500 बिलियन डॉलर का सामान अमेरिका से खरीदेगा।जैसे- अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद (तेल-गैस), विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट, खेती का सामान और कोयला।

कुल मिलाकर ये ट्रेड डील अमेरिका के फायदे की डील है और इससे भारत का भयंकर नुकसान है. नरेंद्र मोदी ने किसानों और व्यापारियों के हितों का जरा भी ध्यान नहीं रखा. भारत का पूरा बाजार थाली में सजाकर ट्रंप को सौंप दिया।

मोदी ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनपर Epstine Files का भयंकर दबाव है. वो किसी भी हाल में खुद को बचाना चाहते हैं।

इसलिए ऐसी डील पर साइन कर दिया, जिससे भारत को बड़ा नुकसान होने वाला है।

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