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भारत-ईयू एफटीए फाइनल, लेकिन तुर्की को झटका! ईयू पोर्ट से भी भारत नहीं पहुंच पाएंगे तुर्की के सामान

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच जिस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगी है, उसे यूं ही ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ नहीं कहा जा रहा। करीब 20 साल तक चली लंबी बातचीत के बाद अब दोनों पक्ष औपचारिक हस्ताक्षर की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इस बड़े समझौते के साथ ही एक अहम सवाल भी उठ खड़ा हुआ है—क्या तुर्की इस डील के जरिए अपने सामान भारत तक पहुंचा पाएगा?


सरकारी अधिकारियों का जवाब साफ है: नहीं। भले ही तुर्की का ईयू के साथ सीमा शुल्क संघ (Customs Union) हो और तुर्की के सामान ईयू के बंदरगाहों से होकर गुजरें, लेकिन भारत में उन्हें एफटीए की रियायतें नहीं मिलेंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “भारतीय उत्पाद ईयू में जाकर तुर्की जैसे देशों तक पहुंच सकते हैं, लेकिन तुर्की के उत्पाद भारत में एफटीए का फायदा नहीं उठा सकते, क्योंकि तुर्की इस समझौते में ईयू के क्षेत्र के रूप में शामिल नहीं है।”

तुर्की को क्यों नहीं मिलेगा फायदा

असल वजह 1996 से लागू ईयू-तुर्की सीमा शुल्क संघ है। इस व्यवस्था में तुर्की को ईयू के सामान्य बाहरी शुल्क का पालन करना पड़ता है। यानी जब ईयू भारत जैसे किसी देश को शुल्क में छूट देता है, तो तुर्की को भी भारतीय सामानों पर वही छूट देनी होती है। लेकिन इसका उल्टा लागू नहीं होता। तुर्की के उत्पाद भारत में सीधे या ईयू के रास्ते आने पर भी एफटीए के तहत शुल्क लाभ के हकदार नहीं होंगे। यह संघ सिर्फ औद्योगिक और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों तक सीमित है, जबकि सेवाएं, निवेश, डिजिटल व्यापार और सरकारी खरीद इसके दायरे से बाहर हैं।

भारतीय उद्योगों के लिए बड़े मौके

इस डील से भारत को कई मोर्चों पर बड़ा फायदा मिलने वाला है। ईयू के 263.5 अरब डॉलर के कपड़ा और परिधान आयात बाजार में भारतीय उत्पादों को शून्य शुल्क पहुंच मिलेगी, जिससे बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों पर भारत की बढ़त तय मानी जा रही है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारों पर शुल्क 110% से घटकर 10% होने की बात कही जा रही है, वहीं स्टील निर्यात को भी सीबीएएम जैसी बाधाओं के बावजूद मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की ‘विकसित भारत 2047’ सोच के अनुरूप बताया है। ईयू भी इसे वैश्विक व्यापार में एक नए अध्याय की शुरुआत मान रहा है। एमएसएमई, रोजगार और सतत विकास के लिहाज से यह डील भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब भारत यूके, ईएफटीए और अन्य देशों के साथ भी अपने व्यापारिक रिश्ते लगातार मजबूत कर रहा है।

news desk

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