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ऊर्जा संकट से निपटने का सरकार का बड़ा प्लान,इंडक्शन कुकर और पेट्रोकेमिकल्स उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका संघर्ष और हार्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने के असर अब भारत की घरेलू ऊर्जा रणनीति पर भी साफ दिखने लगे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने एलपीजी पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए इंडक्शन कुकर, इंडक्शन हीटर, संगत बर्तनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तैयार की है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, डीपीआईआईटी (DPIIT) की अगुवाई में एक हाई-लेवल इंटर-मिनिस्ट्रियल बैठक हुई, जिसमें पावर सेक्रेटरी, DGFT और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में इंडक्शन बेस्ड कुकिंग उपकरणों की पूरी मैन्युफैक्चरिंग चेन, उनसे जुड़े बर्तनों की उपलब्धता और पेट्रोकेमिकल सप्लाई की समीक्षा की गई। साथ ही जूट बैग्स और अन्य पैकेजिंग जरूरतों पर भी चर्चा हुई।

भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा गल्फ क्षेत्र से आयात करता है। हार्मुज के जरिए तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से रसोई गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर घरेलू किचन, होटल-रेस्तरां और इंडस्ट्रियल यूनिट्स तक पहुंच रहा है। इसी वजह से सरकार अब इलेक्ट्रिक कुकिंग सॉल्यूशन जैसे इंडक्शन टेक्नोलॉजी को तेजी से बढ़ावा देना चाहती है।

पेट्रोकेमिकल सेक्टर को बड़ी राहत

सरकार ने 40 अहम पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। इनमें मेथनॉल, टोल्यून, स्टाइरीन, फिनोल, एनहाइड्रस अमोनिया जैसे जरूरी फीडस्टॉक्स शामिल हैं। इस राहत से फार्मा, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, पैकेजिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और केमिकल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे सरकार पर करीब ₹1,800 करोड़ का राजस्व असर पड़ेगा।

पृष्ठभूमि

28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद हार्मुज रूट पर दबाव बढ़ा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और केमिकल सप्लाई चेन प्रभावित हुई। भारत में इसका असर यह हुआ कि इंडक्शन कुकर की बिक्री अचानक कई गुना बढ़ गई और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कई मॉडल आउट ऑफ स्टॉक हो गए।

सरकार का मानना है कि यह संकट कुछ और महीनों तक चल सकता है, इसलिए अलग-अलग परिदृश्यों के लिए तैयारी की जा रही है। साथ ही PNG और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा देने की योजना है।

विशेषज्ञों की राय

विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम सिर्फ तात्कालिक संकट से निपटने का तरीका नहीं है, बल्कि लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। इंडक्शन कुकर गैस की तुलना में ज्यादा ऊर्जा-कुशल माने जाते हैं, हालांकि बिजली सप्लाई और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी समान ध्यान देना होगा।

फिलहाल देश में तेल या गैस की कोई तत्काल कमी नहीं बताई गई है, लेकिन सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है

news desk

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