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शशि थरूर के काफिले पर हमला मामले में एक आरोपी उमर गिरफ्तार, चुनाव प्रचार के दौरान हुई घटना ने बढ़ाया सियासी तापमान

तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूरके काफिले को शुक्रवार शाम मलप्पुरम जिले के वांडूर इलाके में रोक दिए जाने और उनके गनमैन व ड्राइवर पर हमला किए जाने की घटना सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जबकि एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है।

यह घटना चेल्लितोडु ब्रिज, थिरुवल्ली के पास हुई, जब थरूर यूडीएफ उम्मीदवार ए.पी. अनिल कुमार के समर्थन में चुनाव प्रचार कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके काफिले में दो गाड़ियां थीं। इसी दौरान बाइक और कार से आए कुछ लोगों ने काफिले को रोक लिया और आगे बढ़ने से मना कर दिया। माहौल जल्द ही गरमा गया और गाली-गलौज शुरू हो गई।

जब थरूर के गनमैन रतीश के.पी. ने रास्ता साफ कराने की कोशिश की, तो हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। ड्राइवर के साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद वांडूर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मुख्य आरोपी उम्मरा/उमर नाम के व्यक्ति को हिरासत में लिया है और दो वाहन भी जब्त किए गए हैं। बाकी आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश जारी है।

राहत की बात यह रही कि शशि थरूर पूरी तरह सुरक्षित रहे और बाद में अपने चुनावी कार्यक्रम में शामिल भी हुए। बाद में उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा कि वे सुरक्षित हैं, जबकि कांग्रेस ने इस घटना को चुनावी माहौल में बढ़ती हिंसा से जोड़कर देखा है।

पुलिस क्या कह रही है?

वांडूर पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। केस में मारपीट, गाली-गलौज और वाहन रोकने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश या चुनावी प्रतिद्वंद्विता तो नहीं है। अभी तक किसी पार्टी लिंक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यह घटना ऐसे समय हुई है जब केरल विधानसभा चुनाव 2026 का प्रचार अपने चरम पर है। मलप्पुरम जिला यूडीएफ और एलडीएफ के बीच कड़े मुकाबले के लिए जाना जाता है, इसलिए इस तरह की घटनाएं चुनावी माहौल को और गर्मा सकती हैं। मतदान 9 अप्रैल को होना है।

कांग्रेस नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार से थरूर और अन्य स्टार प्रचारकों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसी घटनाएं चुनाव के आखिरी दिनों में नैरेटिव और वोटर सेंटिमेंट दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

news desk

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