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क्या है “I Love Muhammad” मूवमेंट की स्टोरी, जो देशभर में बन गया है चर्चा का विषय ?

देश के कई हिस्सों में अचानक “I Love Muhammad” अभियान को लेकर मुस्लिम समाज सड़कों पर उतर आया है. उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुआ ये अभियान उन्नाव, बरेली, कौशांबी, लखनऊ और महाराजगंज जैसे ज़िलों से लेकर अब उत्तराखंड के काशीपुर और तेलंगाना के हैदराबाद तक रैलियों और जुलूसों तक पूरे देश में दिखने लगा है. आइये जानते हैं क्या हैं देश में चल रहे इस “I Love Muhammad” अभियान के पीछे क्या है स्टोरी , कहां से हुई थी इसकी शुरूआत.

पैग़ंबर मुहम्मद साहब की महान शख़्सियत को दुनिया को बताना था उद्देश्य

साल 2005–06 में डेनमार्क में एक अख़बार ने पैग़ंबर मुहम्मद साहब को लेकर विवादित कार्टून छापे थे, जिसके बाद यह ख़बर आग की तरह पूरी दुनिया में फैली गई थी. इस मुद्दे पर मुस्लिम देशों ने भी आपत्ति जताई थी. साथ ही कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए थे, जो कहीं-कहीं हिंसक भी हो उठे थे. लेकिन इसी माहौल में कुछ विद्वानों और नौजवानों ने सोचा कि सिर्फ़ ग़ुस्सा और तोड़फोड़ से दुनिया में पैग़ंबर की असल छवि नहीं पहुँचेगी.

यहीं से “I Love Muhammad” जैसा अभियान जन्मा. मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के युवाओं ने सोशल मीडिया पर यह नारा उठाया कि—‘अगर कोई हमारे नबी को गलत समझ रहा है, तो क्यों न हम उनकी असली शख़्सियत दुनिया को बताएं?’

इस तरह धीरे-धीरे “I Love Muhammad” एक पॉज़िटिव मूवमेंट बनता गया. इसी के साथ टी-शर्ट, पोस्टर, बैनर, ऑनलाइन प्रोफाइल पिक्चरों पर भी यह स्लोगन दिखने लगा. इस मूवमेंट को आगे बढ़ाते हुए मस्जिदों और इस्लामी संगठनों ने भी सभाएँ कीं और जहां वे पैग़ंबर मुहम्मद साहब के जीवन की जुड़ी कहानियाँ सुनाए थे, जैसे- कैसे वे गरीबों और जरूरतमंदों के मददगार थे और किस तरह उन्होंने दुनिया को इंसाफ़ और बराबरी की राह दिखाई.

मोहब्बत का संदेश देता था “I Love Muhammad” मूवमेंट

इस आंदोलन की ख़ास बात यह थी कि इसमें हिंसा की कहीं भी जगह नहीं थी. इस आंदोलन ने मोहब्बत और प्रचार का रास्ता अपनाया था. इसके माध्यम से लोग यह संदेश देने लगे थे कि – हम पैग़ंबर से प्यार करते हैं और उसी प्यार के ज़रिए दुनिया को बताना चाहते हैं कि वे रहमतुल लिल आलमीन (सारे जहान के लिए रहमत/मेहरबानी) हैं.

इस तरह “I Love Muhammad” आंदोलन की शुरुआत एक विवाद के जवाब में हुई थी. जिसके बाद यह एक वैश्विक धार्मिक-सांस्कृतिक मुहिम बन गया, जो आज भी सोशल मीडिया और रैलियों में दिखाई देता है.

news desk

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