बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर मामले और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अब राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी ने इस घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए शनिवार को अपने सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल बरेली भेजने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया. सुबह करीब 11 बजे सपा सांसद इकरा हसन, हरेंद्र मलिक समेत कई नेता दिल्ली से रवाना हुए थे, लेकिन यूपी गेट पर पहले से मौजूद पुलिस बल ने काफिले को आगे नहीं बढ़ने दिया. करीब डेढ़ घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा और जाम की स्थिति बनी रही. इस दौरान सांसदों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की तक हुई. हरेंद्र मलिक ने मौके से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को फोन पर पूरी जानकारी दी.
“देश में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल” – हरेन्द्र मालिक
सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि अगर बरेली में निषेधाज्ञा लागू है तो उन्हें वहां रोका जाए, दिल्ली बॉर्डर पर रोकना बताता है कि भाजपा सरकार विपक्ष से डर गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल बना दिया गया है. वहीं इकरा हसन ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल केवल बरेली की सच्चाई जानने और प्रभावित लोगों से मिलने जा रहा था. न कोई उकसावा था और न ही कोई प्रदर्शन. उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार सच्चाई सामने नहीं आने देना चाहती. पुलिस और सांसदों के बीच हुई नोकझोंक की वजह से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम लग गया. तनावपूर्ण माहौल के बीच किसी भी नेता को आगे नहीं बढ़ने दिया गया और प्रतिनिधिमंडल को वापस लौटना पड़ा. घटना के बाद सपा ने भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और सदन से सड़क तक संघर्ष की घोषणा की है.