मध्य पूर्व (West Asia) में जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी वायुसेना ने अपनी सबसे घातक और विनाशकारी युद्ध रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत अमेरिका ने अपने ‘स्ट्रैटेजिक बॉम्बर ट्रायड’ (B-1B Lancer, B-2 Spirit और B-52H Stratofortress) को एक साथ युद्ध के मैदान में उतार दिया है।
ईरान के परमाणु ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल बंकरों और सामरिक कमान केंद्रों पर इन तीनों बॉम्बर्स की सिंक्रोनाइज्ड एयर स्ट्राइक्स ने ईरानी रक्षा प्रणाली (Air Defense) की कमर तोड़कर रख दी है।
दुनिया का सबसे उन्नत स्टेल्थ बॉम्बर B-2 स्पिरिट (B-2A Spirit) इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
‘बोन’ (Bone) के नाम से मशहूर B-1B लैंसर अपनी सुपरसोनिक रफ्तार (लगभग 1,400 किमी/घंटा) और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता के लिए जाना जाता है।
1955 से सेवा में मौजूद और 14,200 किमी की कॉम्बैट रेंज वाला B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस अमेरिका का सबसे विश्वसनीय और भारी पेलोड (31,500 किग्रा) ले जाने वाला बॉम्बर है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने इन तीनों बॉम्बर्स को पूरक (Complementary) भूमिकाओं में तैनात किया है:
सामरिक रणनीति: B-2 चुपके से दुश्मन की वायु सुरक्षा को ध्वस्त करता है, B-1 अपनी तेज़ रफ़्तार से महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह करता है, और B-52 लंबी दूरी से लगातार बमबारी करके रसद और आपूर्ति नेटवर्क को नष्ट कर देता है।
इसी त्रिस्तरीय रणनीति (Triad Strategy) की वजह से ईरान के सीजिल-2 (Sejjil-2) मिसाइल ठिकानों और मिसाइल कारखानों को भारी क्षति पहुंची है, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिका का हवाई वर्चस्व स्थापित हो गया है।
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