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भारत में एक दिन में कितना होता है पेट्रोल-डीजल खपत? सप्लाई रुकी तो कितने दिन चल पाएगा देश का ईंधन भंडार

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में यह सवाल भी उठ रहा है कि भारत हर दिन कितना पेट्रोल और डीजल खपत करता है और अगर वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो जाए तो देश के पास कितने दिनों का ईंधन भंडार मौजूद है।

रोजाना 13 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल की खपत

पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिदिन करीब 130 मिलियन लीटर यानी लगभग 13 करोड़ लीटर पेट्रोल की खपत होती है। सालाना आधार पर यह आंकड़ा करीब 47.5 बिलियन लीटर तक पहुंच जाता है।

देश में लगातार बढ़ती वाहन संख्या, तेजी से हो रहा शहरीकरण और यात्रा की बढ़ती जरूरतें पेट्रोल की मांग को लगातार ऊपर ले जा रही हैं। दोपहिया और निजी चारपहिया वाहनों का बड़ा हिस्सा अब भी पेट्रोल आधारित है, जिससे इसकी खपत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

डीजल की मांग पेट्रोल से दोगुने से भी ज्यादा

भारत में डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में कहीं अधिक है। देश में प्रतिदिन लगभग 290 से 300 मिलियन लीटर यानी 29 से 30 करोड़ लीटर डीजल इस्तेमाल किया जाता है।

मालवाहक ट्रक, बसें, कृषि मशीनें और कई औद्योगिक गतिविधियां मुख्य रूप से डीजल पर निर्भर हैं। यही वजह है कि डीजल की मांग पेट्रोल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा बनी रहती है।

आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है भारत

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है, लेकिन अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। देश की कुल आवश्यकता का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात के जरिए आता है।

भारत को प्रतिदिन करीब 5 से 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होती है। रिफाइनरियों में इसी कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही

पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, वाहन बिक्री में बढ़ोतरी और परिवहन क्षेत्र के विकास के कारण ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि घरेलू उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता में भी सुधार हुआ है, लेकिन मांग की रफ्तार उससे कहीं अधिक तेज बनी हुई है।

इसी कारण देश को लगातार बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है।

सप्लाई रुकने पर कितने दिन चल सकता है भारत?

वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने जैसी स्थितियों से निपटने के लिए भारत रणनीतिक और वाणिज्यिक दोनों तरह के तेल भंडार रखता है। सरकारी और तेल कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में देश के पास इतना पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है कि लगभग 60 दिनों तक घरेलू मांग को पूरा किया जा सकता है।

सरकार भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को और मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

दुनिया में समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होता है। यदि किसी कारण से इस मार्ग पर बाधा आती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

भारत भले ही कई देशों से तेल खरीदता हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर देश की ऊर्जा लागत, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। यही कारण है कि मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

vineet verma

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