नई दिल्ली: पिछले छह महीनों में रसोई का खर्च तेजी से बढ़ा है। टमाटर, प्याज, आलू जैसी सब्जियों से लेकर दूध, खाद्य तेल, चीनी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी ने मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित किया है। सरकारी और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई बढ़ने से कई परिवारों के मासिक राशन खर्च में करीब 8 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
6 महीने में कैसे बदली आम आदमी की रसोई की तस्वीर
अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच रोजमर्रा की कई जरूरी चीजों के दामों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। प्याज, टमाटर और आलू जैसी सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल आया। अप्रैल में जहां प्याज 20 से 30 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
बेमौसम बारिश और खरीफ फसलों की आवक में देरी के कारण सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके अलावा मंडियों तक सामान पहुंचाने का परिवहन खर्च बढ़ने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा, जिसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ा।
खाद्य महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें क्या रहीं
देश में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण रहे। मौसम में बदलाव, फसलों की सप्लाई में कमी और बढ़ती परिवहन लागत ने सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाए।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आयात शुल्क में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। आयातित पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू खाद्य तेल महंगा हुआ।
इसके अलावा पशु चारे की बढ़ी हुई लागत के कारण डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में 2 रुपये से 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कितना बदलाव आया
आम उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में अप्रैल 2026 से अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत करीब 913 रुपये से 942 रुपये के बीच बनी हुई है।
हालांकि, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला। अप्रैल 2026 की शुरुआत में इसके दामों में करीब 195.50 रुपये से 218 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी। जुलाई में कुछ राहत मिली, लेकिन 1 अक्टूबर 2026 से फिर इसमें 62.50 रुपये से 71.50 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई।
दूध के दामों ने भी बढ़ाई रसोई की चिंता
अप्रैल 2026 से अब तक अलग-अलग राज्यों और शहरों में दूध की कीमतों में 2 रुपये से 9 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है। मदर डेयरी और अमूल जैसे प्रमुख ब्रांडों के दाम भी बढ़े हैं।
बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने 1 सितंबर 2026 से थोक दूध की कीमतों में 9 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की, जिसके बाद खुला दूध 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो गया।
वहीं, 1 अक्टूबर 2026 से इंदौर में दूध के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। होम डिलीवरी वाला दूध 60 रुपये से बढ़कर 63 रुपये और दुकान पर मिलने वाला दूध 63 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति लीटर हो गया। कर्नाटक सरकार ने नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसे जल्द लागू किया जा सकता है।
चीनी की मिठास पर महंगाई का असर
हाल के महीनों में चीनी की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। सितंबर में कई राज्यों और शहरों में चीनी 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
हालांकि, सरकार के हस्तक्षेप के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन अभी भी चीनी का भाव करीब 60 से 65 रुपये प्रति किलो बना हुआ है।
खाद्य तेल महंगा होने से बढ़ी खाना पकाने की लागत
खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों ने भी घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी बाधाओं और ऊर्जा लागत बढ़ने के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी बनी रही।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में खाद्य तेल सालाना आधार पर करीब 7 प्रतिशत महंगे थे। जून में यह बढ़ोतरी करीब 10 प्रतिशत और जुलाई में करीब 11 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसका असर रोजाना के खाने की लागत पर पड़ा।
घर में बनने वाली थाली भी हुई महंगी
क्रिसिल इंटेलिजेंस की रोटी-राइस रेट रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में घर पर बनने वाली वेज थाली की औसत कीमत 26.5 रुपये थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर 30.80 रुपये हो गई।
वहीं, नॉन-वेज थाली की लागत इसी अवधि में 54.3 रुपये से बढ़कर 59.50 रुपये तक पहुंच गई। यानी घर में खाना बनाना भी अब पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।
महंगाई ने कैसे बदली आम आदमी की खर्च करने की क्षमता
खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का असर परिवारों की बचत और खर्च दोनों पर पड़ा है। बढ़ते राशन खर्च के कारण कई परिवारों को दूसरी जरूरतों पर कटौती करनी पड़ रही है।
महंगाई के चलते खरीदारी में कमी, घरेलू खर्च बढ़ना, बचत पर असर, फिक्स्ड इनकम वाले परिवारों की परेशानी और कर्ज की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां सामने आई हैं।
ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ी आर्थिक चिंता
आरबीआई के सितंबर 2026 के ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को मापने वाला सूचकांक जनवरी के 100.5 से गिरकर सितंबर में 90.6 पर पहुंच गया।
यह गिरावट रोजगार, आय, अर्थव्यवस्था और कीमतों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती चिंता को दिखाती है। महंगाई का असर अब शहरों के साथ-साथ गांवों के परिवारों के बजट पर भी साफ नजर आ रहा है।
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