नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष रणनीति लागू की है। इस संवेदनशील समुद्री मार्ग में फिलहाल 13 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जबकि कई जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। सरकार का पूरा फोकस इन जहाजों की सुरक्षित वापसी पर है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल हो गया है। 9 अप्रैल को सीजफायर लागू होने के बावजूद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
ओमान और ईरान के बीच स्थित इस संकरे समुद्री मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। मौजूदा हालात में ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के शिपिंग निदेशक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में 13 भारतीय जहाज मौजूद हैं।
इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं। सरकार की प्राथमिकता इन सभी जहाजों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की है।
अधिकारियों के अनुसार, जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए पूरा समन्वय विदेश मंत्रालय के माध्यम से किया जा रहा है। कौन सा जहाज पहले निकलेगा, इसका निर्णय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर तय किया जा रहा है।
हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। माना जा रहा है कि भारत एक विशेष रणनीति के तहत अपने जहाजों को क्रमबद्ध तरीके से बाहर निकाल रहा है।
ताजा जानकारी के अनुसार, 25-26 मई की रात लगभग 2,70,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर जा रहा एक बड़ा क्रूड ऑयल टैंकर सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुका है।
इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अब तक 14 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं और भारत पहुंच चुके हैं, जबकि 11 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं।
जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े सार्वजनिक डेटा के उपयोग पर सरकार का कहना है कि ये कमर्शियल प्लेटफॉर्म हैं, जिनका उपयोग कोई भी कर सकता है। ऐसे डेटा का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाता है, यह उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है।
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यही डेटा सरकार के लिए जहाजों की निगरानी और ट्रैकिंग में सहायक साबित हो रहा है।
संघर्ष के बाद कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही कम कर दी है, लेकिन इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को जारी रखा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई भारतीय जहाजों ने जोखिम के बावजूद इस संवेदनशील जलमार्ग को पार किया है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था बनी हुई है।
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