नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों (housewives) को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो देशभर में मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों (Motor Accident Compensation Cases) की दिशा बदल देगा।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि घर का कामकाज संभालने वाली महिलाएं केवल परिवार की देखभाल नहीं करतीं, बल्कि वे ‘राष्ट्र निर्माण’ (nation builder) में प्रत्यक्ष भागीदार हैं।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं:
अदालत ने पंजाब के वर्ष 2001 के एक पुराने मामले (रेशमा बनाम दुर्घटना मामला) पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताई कि कैसे एक मुआवजा मामला दो दशकों से अधिक समय तक अदालतों में लंबित रहा।
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आने वाले समय में मोटर दुर्घटना मुआवजे की राशि में भारी वृद्धि होगी। यह निर्णय न केवल गृहिणियों के श्रम को आर्थिक मान्यता देता है, बल्कि अदालती दावों में उनके योगदान को भी उचित सम्मान प्रदान करता है।
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