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गृहिणियों का काम अब ‘आर्थिक मूल्य’ के बराबर! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मुआवजे के नियम बदले

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों (housewives) को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो देशभर में मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों (Motor Accident Compensation Cases) की दिशा बदल देगा।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि घर का कामकाज संभालने वाली महिलाएं केवल परिवार की देखभाल नहीं करतीं, बल्कि वे ‘राष्ट्र निर्माण’ (nation builder) में प्रत्यक्ष भागीदार हैं।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या हैं मुख्य बिंदु?

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं:

  • न्यूनतम मूल्य 30,000 रुपये: कोर्ट ने निर्धारित किया है कि सड़क दुर्घटना में गृहिणी की मृत्यु या अक्षमता होने पर, उनके द्वारा की जाने वाली घरेलू सेवाओं की क्षति का मूल्य न्यूनतम 30,000 रुपये प्रति माह माना जाएगा।
  • स्वतंत्र कैटेगरी: मुआवजे की गणना में ‘लॉस ऑफ डोमेस्टिक केयर’ (Loss of Domestic Care) को अब एक अलग और स्वतंत्र कैटेगरी माना जाएगा।
  • श्रम का सम्मान: कोर्ट ने कहा कि घरेलू कार्यों का आर्थिक मूल्य होता है, भले ही इसके लिए प्रत्यक्ष वेतन न मिलता हो। अब मुआवजे के लिए उन्हें केवल ‘न्यूनतम मजदूरी’ के पैमाने पर नहीं तौला जाएगा।

क्यों अहम है यह निर्णय?

अदालत ने पंजाब के वर्ष 2001 के एक पुराने मामले (रेशमा बनाम दुर्घटना मामला) पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताई कि कैसे एक मुआवजा मामला दो दशकों से अधिक समय तक अदालतों में लंबित रहा।

  • समयबद्ध निपटारा: सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि मोटर दुर्घटना मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं।
  • सामाजिक मान्यता: जस्टिस करोल ने कहा कि गृहिणी बच्चों के पालन-पोषण और परिवार की व्यवस्था के जरिए जो योगदान देती हैं, वह समाज और राष्ट्र के विकास में नींव का काम करता है।

आम जनता पर असर

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आने वाले समय में मोटर दुर्घटना मुआवजे की राशि में भारी वृद्धि होगी। यह निर्णय न केवल गृहिणियों के श्रम को आर्थिक मान्यता देता है, बल्कि अदालती दावों में उनके योगदान को भी उचित सम्मान प्रदान करता है।

news desk

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