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“आखिर आदेश किसने दिया,क्या वे आतंकवादी हैं”! छात्र प्रदर्शनों पर बल प्रयोग को लेकर प्रियंका गांधी का केंद्र पर तीखा प्रहार

देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्र आंदोलनों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। संसद के सत्र में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि अपने भविष्य की सुरक्षा और न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतरे बेकसूर छात्रों के खिलाफ इस कदर दमनकारी कार्रवाई करने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ था?

पुलिस बर्बरता पर सख्त सवाल

प्रियंका गांधी ने संसद के पटल से सुरक्षा बलों द्वारा अपनाए गए कड़े रवैये की तीखी आलोचना की। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वाटर कैनन, आंसू गैस के गोले, लाठीचार्ज और यहाँ तक कि पेलेट गन का इस्तेमाल किस आधार पर किया गया? उन्होंने तल्ख अंदाज में पूछा कि क्या हक मांग रहे युवा देश के नागरिक थे या कोई खूंखार आतंकवादी, जिनके खिलाफ इस स्तर का बल प्रयोग किया गया।

आगे कहा “जो छात्र देश का कल संवारने के लिए आवाज उठा रहे हैं, क्या उनके खिलाफ पेलेट गन और घातक हथियारों का इस्तेमाल वाजिब है? सरकार को साफ करना होगा कि इस कार्रवाई का जिम्मेदार कौन है।”

महिला छात्रों के साथ कथित बदसलूकी पर गंभीर चिंता

प्रियंका गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्राओं के साथ हुई कथित प्रशासनिक बदसलूकी और धक्का-मुक्की का मुद्दा भी बेहद प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों को न केवल अपमानित किया गया, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता का चरम है और इस पर देश के शीर्ष नेतृत्व को जवाब देना होगा।

सरकार से जवाब मांगने के साथ एकजुट हुआ विपक्ष

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद ने सीधे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से अपनी चुप्पी तोड़ने और जवाब देने की मांग की। संसद के भीतर प्रियंका गांधी के इस हमले के बाद विपक्षी खेमे के अन्य नेताओं ने भी सरकार को बैकफुट पर धकेलने का काम किया। विपक्ष का कहना है कि सरकार असल गुनहगारों और पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों को दबाने में लगी है।

आंदोलन की नई दिशा

संसद से उठी इस आवाज ने देश भर के छात्र संगठनों और युवा समूहों में एक नया जोश भर दिया है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा नहीं किया जाता और दर्ज किए गए मामले वापस नहीं होते, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी के इस तीखे बयान ने छात्र राजनीति और परीक्षाओं की पारदर्शिता के मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।

news desk

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