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खाड़ी में भड़की जंग की आग, होर्मुज बंद होते ही तेल बाजार में मचा हड़कंप और ट्रंप बोले– अरब देश भी उतरना चाहते हैं मैदान में

नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बेकाबू होते दिख रहे हैं। जो टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई से शुरू हुआ था, वह अब कई देशों तक फैल चुका है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बड़े तेल-ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है, जिससे पूरे इलाके में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।

तीसरे दिन यानी 3 मार्च 2026 तक संघर्ष और भी तेज हो गया। अमेरिका-इजराइल ने ईरान की मिसाइल क्षमता, नौसेना, परमाणु कार्यक्रम और उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स पर बड़े हमले किए। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने के बाद ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक 555 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

खाड़ी में हमले, तेल ठिकाने और अमेरिकी अड्डे बने निशाना

ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, वहीं सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को टारगेट किया। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला हुआ, जबकि रास लफ्फान और रास तनूरा जैसे बड़े तेल ठिकानों पर भी हमले की खबरें हैं। इससे तेल उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है।

सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर दी। यह समुद्री रास्ता दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगभग 9% तक उछल गईं।

ट्रंप का दावा, अरब देशों की एंट्री पर सस्पेंस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि कई अरब देश अब ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के “अंधाधुंध” हमलों से खाड़ी देश नाराज हैं। हालांकि सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों ने हमलों की निंदा जरूर की है, लेकिन खुले तौर पर युद्ध में उतरने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इस बीच अमेरिकी सेना के 6 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि इजराइल में 11 लोगों के मारे जाने की खबर है। लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ भी टकराव तेज हो गया है और बेरूत में हमले हुए हैं। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने नागरिकों को तुरंत क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी जारी की है।

ट्रंप का कहना है कि यह युद्ध 4-5 हफ्ते तक चल सकता है, लेकिन जरूरत पड़ी तो इससे भी ज्यादा लंबा खिंच सकता है। वहीं ईरान के वरिष्ठ अधिकारी अली लारिजानी ने इन दावों को “भ्रम” बताते हुए कहा है कि ईरान लंबी लड़ाई के लिए तैयार है।

कुल मिलाकर, इस संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, महंगाई का खतरा मंडरा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम की अपील कर रहा है। लेकिन फिलहाल हालात सुधरते नहीं, बल्कि और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

news desk

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