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होर्मुज में ‘ब्लॉकेड’ के बीच शांति की उम्मीद: अमेरिका-ईरान में 14 दिन और बढ़ेगा सीजफायर, ट्रंप ने चीन को लिखा गुप्त पत्र

वाशिंगटन/तेहरान। मिडिल-ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को बड़ी राहत दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी अमेरिकी नाकेबंदी और परमाणु हथियारों की तकरार के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ईरान को लेकर कुछ नरम पड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा सीजफायर (Ceasefire) अगले दो हफ्तों के लिए बढ़ाया जा सकता है।

न्यूज एजेंसी ‘एपी’ (AP) के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद दोनों देश दोबारा मेज पर बैठने को तैयार दिख रहे हैं।

बातचीत के टेबल पर होंगे ये 3 ‘महा-मुद्दे’

अगर यह सीजफायर बढ़ता है और वार्ता शुरू होती है, तो इन तीन प्रमुख बिंदुओं पर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी-

  • परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program): ईरान के बढ़ते परमाणु संवर्धन पर अंकुश लगाने की अमेरिकी शर्त।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल सप्लाई के इस लाइफलाइन रूट से नाकेबंदी हटाना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • मुआवजा (Compensation): युद्ध के दौरान हुए आर्थिक नुकसान और प्रतिबंधों के बदले मुआवजे की मांग।

ट्रंप का शी जिनपिंग को ‘सीक्रेट’ लेटर: चीन का बड़ा खुलासा

इस युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर भी एक बड़ा अपडेट सामने आया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वे ईरान को हथियारों की सप्लाई न करें।

ट्रंप के मुताबिक, “जिनपिंग ने मुझे जवाबी पत्र लिखकर भरोसा दिया है कि वे ईरान को हथियार नहीं दे रहे हैं। अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हैं, तो हमें कुछ समय तक उनके साथ रहना होगा, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे कब तक टिक पाएंगे।”

नाकेबंदी का असर: “पीछे हटें तो ईरान को लगेंगे 20 साल”

मंगलवार को ट्रंप ने यह दावा कर हलचल मचा दी थी कि ईरान के साथ युद्ध अब खत्म होने के करीब है। हालांकि, उन्होंने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए कहा कि ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने नाकेबंदी के पहले 24 घंटों में ही ईरान के बंदरगाहों को पूरी तरह ठप कर दिया है।

ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा, “अगर हम अभी पीछे हट जाएं, तो ईरान को दोबारा उसी स्थिति में खड़े होने में 20 साल लग जाएंगे।”

क्या युद्ध टल गया है?

जानकारों का मानना है कि दो हफ्ते का सीजफायर विस्तार केवल एक ‘ब्रीदिंग स्पेस’ (राहत का पल) है। पाकिस्तान में होने वाली प्रस्तावित बैठक इस युद्ध का भविष्य तय करेगी। यदि बातचीत विफल रही, तो होर्मुज की नाकेबंदी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘ब्लैक होल’ साबित हो सकती है।

ट्रंप की ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ काम करती दिख रही है। एक तरफ वे ईरान की आर्थिक कमर तोड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता खोलकर खुद को एक ‘शांति दूत’ के रूप में भी पेश कर रहे हैं।

news desk

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