नासिक (महाराष्ट्र) . महाराष्ट्र के नासिक से शुरू हुआ अशोक खरात (Ashok Kharat) का मामला अब केवल अंधश्रद्धा या शोषण तक सीमित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने इस केस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपने के संकेत दिए हैं, क्योंकि जांच में ₹300 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हवाला रैकेट और बेनामी संपत्ति का बड़ा खुलासा हुआ है।
मुख्य खुलासे: अंधश्रद्धा के पीछे छिपा आर्थिक साम्राज्य
अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद हुई जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिन्होंने पुलिस और प्रशासन को चौंका दिया है: ₹300 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन: जांच एजेंसियों को एक बड़े बिल्डर और खरात के बीच करोड़ों के संदिग्ध ट्रांजैक्शन के दस्तावेज मिले हैं।
हवाला रैकेट के सूत्रधार: शक है कि नासिक और पुणे के 5 रसूखदार लोग इस पूरे रैकेट को ऑपरेट कर रहे थे।
डिजिटल सबूत: पुलिस ने मोबाइल चैट्स और वॉइस नोट्स बरामद किए हैं, जो साबित करते हैं कि ‘आशीर्वाद’ देने के बहाने हवाला का पैसा ठिकाने लगाया जा रहा था।
जमीन हड़पने का खेल: अवैध रूप से जमा किए गए इस काले धन का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर जमीनों पर कब्जा करने के लिए किया जा रहा था।
कर्नाटक कनेक्शन और फर्जी बैंक खाते
खरात की जालसाजी का जाल महाराष्ट्र से बाहर पड़ोसी राज्यों तक भी फैला हुआ था:
देवदर्शन के नाम पर फर्जीवाड़ा: कर्नाटक में देवदर्शन के बहाने कई फर्जी बैंक खाते खोले गए थे।
KYC का दुरुपयोग: दूसरों के पैन (PAN) और आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल कर सहकारी पतसंस्थाओं (Co-operative Societies) में बेनामी खाते खुलवाए गए ताकि काले धन को सफेद किया जा सके।
अपराधों की लंबी फेहरिस्त: अब तक 15 केस दर्ज
अशोक खरात फिलहाल पुलिस कस्टडी में है और उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है:
- ताजा मामला: अहमदनगर (नगर) में जबरन वसूली (Extortion) का तीसरा केस दर्ज किया गया है।
- कुल मामले: अब तक खरात के खिलाफ कुल 15 मामले दर्ज हो चुके हैं।
- संगठित अपराध: जांच से स्पष्ट है कि खरात आध्यात्मिक गुरु का चोला ओढ़कर एक संगठित अपराध सिंडिकेट (Organized Crime Syndicate) चला रहा था।
मुख्यमंत्री का बयान: “किसी को बख्शा नहीं जाएगा”
नासिक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा “यह मामला राज्य पुलिस के दायरे से बाहर जाकर बड़े आर्थिक अपराध और अंतरराष्ट्रीय हवाला से जुड़ चुका है। इसकी गहराई तक जाने के लिए ED का दखल जरूरी है। आने वाले दिनों में कई रसूखदार और सफेदपोश बिल्डर कानून के शिकंजे में होंगे।”
क्या होगा आगे?
माना जा रहा है कि ED की एंट्री के बाद पुणे और नासिक के कई बड़े रियल एस्टेट कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जांच एजेंसियां अब उन ‘स्लीपर सेल’ और रसूखदारों की पहचान कर रही हैं जो खरात के आध्यात्मिक प्रभाव का इस्तेमाल अपने काले धन को खपाने में कर रहे थे।
महाराष्ट्र के बहुचर्चित अशोक खरात (Ashok Kharat) मामले में अब एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने राज्य के प्रशासनिक महकमे (Bureaucracy) में हड़कंप मचा दिया है। जांच में सामने आया है कि खुद को ‘कैप्टन’ बताने वाला यह जालसाज न केवल यौन शोषण और धोखाधड़ी में लिप्त था, बल्कि IAS अधिकारियों के तबादलों और महत्वपूर्ण नियुक्तियों का ‘सिंडिकेट’ भी चला रहा था।
मुख्य खुलासा: जिला कलेक्टर की कुर्सी के लिए ‘पैरवी’
जांच एजेंसियों के हाथ लगे नए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला है कि अशोक खरात का प्रभाव मंत्रियों की दहलीज से लेकर बड़े अधिकारियों के केबिन तक था।
- महिला IAS अधिकारी का कनेक्शन: वर्तमान जांच के अनुसार, एक महिला आईएएस अधिकारी ने नासिक के जिला कलेक्टर (DM) पद पर नियुक्ति पाने के लिए अशोक खरात के माध्यम से सीधे पैरवी करवाई थी।
- रिमोट कंट्रोल पावर: यह अधिकारी उस समय जिला परिषद (ZP) में कार्यरत थीं। आरोप है कि उन्होंने जिले की सबसे शक्तिशाली कुर्सी हासिल करने के लिए खरात के ‘रिमोट कंट्रोल’ प्रभाव और राजनीतिक संपर्कों का उपयोग करने की कोशिश की।