Trending News

हरियाणा: कांग्रेस का नया सियासी समीकरण! गुटबाजी से निकलने की राहुल गांधी की मुहिम पर कितना पड़ेगा असर?

हरियाणा में पार्टी की गुटबाजी खत्म करने की कोशिश में कांग्रेस एक बार फिर उसी गुटबाजी में फंसती दिख रही है. हाल ही में राव नरेन्द्र को हरियाणा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ये चर्चा तेज हो गई है. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या राव नरेन्द्र, राहुल गांधी की पसंद नहीं थे.

राव नरेन्द्र को अध्यक्ष बना कर कांग्रेस ने भले ही अपनी परंपरागत राजनीति में बदलाव का संकेत तो दिया है लेकिन गुटबाजी की छाया बनी हुई है. हाईकमान ने एक बार फिर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल का नेता और नेता प्रतिपक्ष बना दिया है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी राव नरेंद्र को सौंपी गई है. 2024 विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के लिए इंतजार चल रहा था. अब पार्टी ने जाट और ओबीसी समाज को अहमियत देते हुए नेतृत्व का बंटवारा किया है. हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाकर जाट समाज को संदेश दिया गया है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर राव नरेंद्र की नियुक्ति कर ओबीसी समाज को पार्टी संगठन में मजबूत जगह दी गई है.

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस लंबे समय तक हरियाणा में दलित नेतृत्व को प्राथमिकता देती रही है, लेकिन इस बार यादव समाज से आने वाले राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने अपने समीकरण बदलने का फैसला किया है. जाट-दलित समीकरण आजमा चुकी कांग्रेस अब जाट-ओबीसी गठजोड़ के जरिए हरियाणा में राजनीतिक बढ़त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

क्या है इस बदलाव के पीछे की वजह

दरअसल हरियाणा में कांग्रेस लंबे समय से विधानसभा चुनावों में जीत नहीं दर्ज कर पा रही है. 2007 से पार्टी ने जाट और दलित समुदाय के समीकरण को साधकर राजनीतिक सफलता की कोशिश की. 2007 में पार्टी ने फूलचंद मुलाना को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एक सियासी प्रयोग किया. मुलाना सबसे लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे, जबकि सत्ता की कमान भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हाथ में थी. इस जाट-दलित गठजोड़ के दम पर कांग्रेस 2014 तक हरियाणा में राज कर पाई. फूलचंद मुलाना के बाद कांग्रेस ने अशोक तंवर, कुमारी सैलजा और चौधरी उदयभान को प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया. ये सभी नेता दलित समुदाय से आते थे. लेकिन अब, 18 साल बाद कांग्रेस ने दलित चेहरे को पीछे रखते हुए ओबीसी समाज से आने वाले राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.

राहुल गांधी की पसंद को लेकर सस्पेंस

प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल का नेता और राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष तो नियुक्त कर दिया लेकिन पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर मतभेद भी रहे. माना जा रहा है कि राहुल गांधी प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए ऐसे मजबूत नेता को चाहते थे जो पार्टी की गुटबाजी से परे जाकर संगठन को मजबूत बनाए.

लेकिन सवाल वही है क्या राव नरेन्द्र, हरियाणा में कुमारी शैलजा और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की गुटबाजी से परे जाकर पार्टी को मजबूत बना पाएंगे

news desk

Recent Posts

क्या अब लीक नहीं होंगे एग्जाम पेपर? जानिए कौन हैं नंदन नीलेकणि, जिन्हें सौंपी गई सबसे बड़ी जिम्मेदारी!

हाल के दिनों में NEET परीक्षा में हुई धांधली से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की…

31 minutes ago

पीएम मोदी के ऐलान के बाद पहली ही सुनवाई में फजीहत! CBI का वकील नहीं पहुंचा, टली NEET पेपर लीक की सुनवाई

देशभर में छात्रों के आक्रोश और सख्त कार्रवाई की मांग के बीच NEET UG 2026…

31 minutes ago

पेट में फंसी गैस से उठता है तेज दर्द? बार-बार हो रही यह समस्या तो न करें नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताए कारण, लक्षण और बचाव के असरदार तरीके

नई दिल्ली: गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण पेट में…

32 minutes ago

NEET का सियासी असर! युवाओं की नाराजगी से क्या 2027 में बदल जाएगा यूपी का चुनावी गणित, BJP क्यों कर रही डैमेज कंट्रोल?

लखनऊ: नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और केंद्रीय…

2 hours ago