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खाड़ी में गहराया पर्यावरण संकट: ईरान के खार्ग आइलैंड के पास दूसरा बड़ा तेल रिसाव, UN ने दी चेतावनी

दुबई/तेहरान। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में एक बड़े पारिस्थितिक संकट (Ecological Crisis) का खतरा मंडरा रहा है। ईरान के खार्ग आइलैंड (Kharg Island) के पास एक और संदिग्ध तेल रिसाव (Oil Spill) मिलने से हड़कंप मच गया है। समुद्री निगरानी संस्था विंडवर्ड AI (Windward AI) के अनुसार, यह दूसरा बड़ा रिसाव है जो ऐसे समय में सामने आया है जब 8 मई को हुआ पहला रिसाव पहले से ही सऊदी अरब की ओर बढ़ रहा है।

संकट के आंकड़े और दिशा

  • नया रिसाव: रविवार सुबह करीब 11 बजे देखा गया, जो 12 से 20 वर्ग किमी में फैला है।
  • पुराना रिसाव: करीब 65 वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र को कवर कर चुका है।
  • खतरे की जद में देश: संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, यह तेल 4 दिनों में कतर और 13 दिनों में यूएई (UAE) के तटों तक पहुँच सकता है।
  • मात्रा: अनुमान है कि समुद्र में हजारों बैरल कच्चा तेल मिल चुका है।

ईरान का आरोप: यूरोपीय टैंकरों पर फोड़ा ठीकरा

ईरान ने इस समुद्री प्रदूषण के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया है। बुशहर प्रांत के सांसद जाफर पूरकबगानी ने दावा किया कि यूरोपीय टैंकरों ने जानबूझकर समुद्र में तेल और दूषित पानी छोड़ा है।

हालांकि, विंडवर्ड AI के विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाजों के ईंधन (Bunker Fuel) के बजाय कच्चा तेल (Crude Oil) है। विशेषज्ञों को संदेह है कि यह या तो जर्जर पाइपलाइनों के फटने से हुआ है या समुद्र के बीच जहाज-से-जहाज (Ship-to-Ship) तेल ट्रांसफर के दौरान हुई किसी बड़ी चूक का नतीजा है।

पर्यावरण और पेयजल पर मंडराता खतरा

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ डॉ. कावेह मदानी ने चेतावनी दी है कि यदि यह तेल का धब्बा रिहायशी इलाकों तक पहुँचता है, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं:

  1. डीसेलिनेशन प्लांट (Desalination Plants): खाड़ी देशों में समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट बंद करने पड़ सकते हैं।
  2. समुद्री जीवन: मछली पालन और समुद्री जैव विविधता को भारी नुकसान।
  3. जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रतिबंधों के कारण ईरान अपनी पुरानी पाइपलाइनों का रखरखाव नहीं कर पा रहा है, जो इस रिसाव की एक बड़ी वजह हो सकती है।

“फारस की खाड़ी में पानी का बहाव बहुत धीमा है, जिसका अर्थ है कि यह प्रदूषण दशकों तक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है।” – डॉ. कावेह मदानी, UN एक्सपर्ट

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