खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) में चल रहे तनाव के शांत होने की उम्मीदें अभी जग ही रही थीं कि अचानक हुए हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। खाड़ी में इस समय बेहद दिलचस्प और खतरनाक खेल चल रहा है जहाँ पर्दे के पीछे 14 बिंदुओं वाले सीजफायर समझौते पर बातचीत अंतिम दौर में है, वहीं मोर्चे पर दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के लड़ाकू विमानों और ड्रोनों को निशाना बना रही हैं।
गूगल न्यूज़ के वैश्विक मापदंडों के अनुसार, इस पूरे सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम का नया विश्लेषण नीचे दिया गया है:
मोर्चे पर टकराव: MQ-9 ड्रोन ढेर, F-35 को खदेड़ा
खाड़ी में गोले-बारूद की गूंज तब दोबारा शुरू हुई जब अमेरिकी नौसेना ने अपनी रक्षा का दावा करते हुए दक्षिणी ईरान की सैन्य नावों पर हमला कर दिया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अमेरिकी वायुसेना को बड़ा झटका देने का दावा किया है।
- MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया: IRGC का दावा है कि उसने ईरान की हवाई सीमा के करीब मंडरा रहे अमेरिकी सेना के अत्याधुनिक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है।
- F-35 और RQ-4 को खदेड़ा: ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट F-35 और RQ-4 ग्लोबल हॉक ड्रोन को ईरानी हवाई क्षेत्र से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
- तस्नीम न्यूज़ की चेतावनी: ईरान ने दो टूक कहा है कि यदि अमेरिका ने सीजफायर वार्ता के बीच सैन्य उल्लंघन किया, तो तेहरान को जवाबी कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
मोजतबा खामेनेई की नई नीति: “अब अमेरिकी बेस के लिए ढाल नहीं बनेंगे खाड़ी देश”
इस सैन्य टकराव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बकरीद के मौके पर अपने टेलीग्राम चैनल और सरकारी टीवी के जरिए खाड़ी देशों (Gulf Countries) को एक कड़ा भू-राजनीतिक संदेश भेजा है।
खामेनेई का बयान (अल जजीरा के अनुसार): “समय के पहिए को पीछे नहीं मोड़ा जा सकता। खाड़ी क्षेत्र के देश अब अपने यहाँ मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ‘मानवीय ढाल’ का काम करना बंद करें। अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया में वाशिंगटन का प्रभाव हर गुजरते दिन के साथ कमजोर हो रहा है।”
टेबल पर कूटनीति: क्या है 14 बिंदुओं का गुप्त ‘मेमोरेंडम’?
एक तरफ जहाँ आसमान में मिसाइलें चल रही हैं, वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक बैकचैनल डिप्लोमेसी (गुप्त वार्ता) भी तेजी से आगे बढ़ रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि दोनों देश एक संभावित समझौते के बेहद करीब हैं, हालांकि अंतिम मुहर अभी बाकी है।
प्रस्तावित समझौते की 3 मुख्य शर्तें:
- 60 दिनों का युद्धविराम: दोनों देश दो महीने के लिए अपनी सभी सैन्य गतिविधियां पूरी तरह रोक देंगे।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खोलना: ईरान इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में वैश्विक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देगा।
- नौसैनिक नाकेबंदी हटाना: इसके बदले अमेरिका खाड़ी क्षेत्र से अपनी आर्थिक और नौसैनिक नाकेबंदी को कम करेगा।
गतिरोध के बड़े कारण (The Deadlock):
इतनी सहमति के बावजूद परमाणु मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को नष्ट करे, जिस पर तेहरान राजी नहीं है। इसके अलावा ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन देने के मुद्दे पर मतभेद बरकरार हैं।
यदि ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ इस ड्राफ्ट को हरी झंडी देती है, तो मोजतबा खामेनेई इस पर अंतिम हस्ताक्षर करेंगे, जिनकी सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।