दिल्ली में प्रदूषण का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है और खराब होती हवा ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली-एनसीआर का पूरा इलाका इस समय जहरीली धुंध की चपेट में है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
धुंध का असर इतना गंभीर हो गया है कि कई इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है और हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। यह धुंध देखने में भले ही कोहरे जैसी लगती हो, लेकिन असल में यह प्रदूषण की एक मोटी परत है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 6 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंचते हुए 491 दर्ज किया गया। AQI का यह स्तर ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में आता है। हालात को देखते हुए प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप-4 (GRAP-4) की पाबंदियां आज से लागू कर दी गई हैं।
कई जगहों पर दृश्यता लगभग शून्य हो चुकी है, जिसके चलते सड़क, रेल और हवाई यातायात पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। खराब हवा और कम विजिबिलिटी के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली की हवा बेहद खराब स्तर पर पहुंचने के चलते दिल्ली सरकार ने स्कूलों को लेकर अहम फैसला लिया है। ग्रैप-4 (GRAP-IV) लागू होने के बाद बच्चों को खतरनाक प्रदूषण से बचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को कक्षा 5 तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई के संयोजन के जरिए शिक्षण कार्य जारी रखें और छात्रों की फिजिकल अटेंडेंस को सीमित करें। इसके अलावा, GRAP-IV के तहत राज्य सरकार और दिल्ली सरकार को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कक्षा 6 से 10 और कक्षा 11 तक की फिजिकल कक्षाएं बंद करने का विकल्प भी दिया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP के तहत कदम उठाए जा रहे हैं, साथ ही नागरिकों से वाहनों का कम उपयोग करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और प्रदूषणकारी गतिविधियों से बचने का आग्रह किया गया है। स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है और त्वरित प्रभावी उपायों की आवश्यकता है।