नई दिल्ली/तेहरान। मध्य पूर्व के अशांत समुद्र से एक ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। शनिवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे भारतीय जहाज ‘भाग्य लक्ष्मी’ को न केवल रोका, बल्कि उसे बीच रास्ते से ही वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
वायरल ऑडियो: “स्ट्रेट अभी भी बंद है सर”
लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग में ईरानी नेवी के अधिकारी और भारतीय जहाज के कैप्टन के बीच हुई बातचीत इस तनाव की गंभीरता को दर्शाती है।
- ईरानी अधिकारी: “वापस जाओ, तुरंत वापस जाओ (Go Back Immediately)। होर्मुज से आवाजाही पर पूरी तरह रोक है।”
- भारतीय कैप्टन: “ठीक है सर, मैं आपकी बात दोहराता हूँ कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी बंद है। हम वापस लौट रहे हैं।”
- इस संवाद के तुरंत बाद ‘भाग्य लक्ष्मी’ ने अपना रास्ता बदल लिया और वापस अपने पोर्ट की ओर मुड़ गया।
गोलीबारी और कूटनीतिक तनाव
यह घटना महज रास्ता रोकने तक सीमित नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले ईरानी गनबोट्स ने इराक से तेल ला रहे दो अन्य भारतीय झंडे वाले जहाजों पर चेतावनी स्वरूप गोलीबारी भी की थी। हालांकि इस हमले में जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसने भारत को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
भारत का कड़ा रुख: दिल्ली में ईरानी राजदूत तलब
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना को ‘अत्यंत गंभीर’ करार दिया है।विदेश सचिव की दो-टूक: दिल्ली में ईरानी राजदूत को बुलाकर भारत ने अपनी गहरी चिंता दर्ज कराई। भारत ने ईरान को वह समय याद दिलाया जब उसने भारतीय जहाजों को सुरक्षित गलियारा दिया था। विदेश सचिव ने उम्मीद जताई कि ईरान इस बार भी सहयोग करेगा और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद करेगा।
ईरान की दोहरी रणनीति: कूटनीति बनाम सैन्य बल
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में लेबनान-इजरायल युद्धविराम के बाद इस मार्ग को खुला बताया था, वहीं दूसरी ओर IRGC ने इसे फिर से सील कर दिया है।
वजह: अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की आर्थिक नाकाबंदी।
नतीजा: ईरान अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जिससे दुनिया की 20% तेल सप्लाई लाइन खतरे में पड़ गई है।
‘भाग्य लक्ष्मी’ को लौटाया जाना और भारतीय जहाजों पर फायरिंग केवल दो देशों का मुद्दा नहीं है। यह इशारा है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच नाकाबंदी का विवाद नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है।