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Global Markets Crash Alert: ट्रंप के ईरान युद्ध बयान के बाद US, Europe और Asia बाजारों में भारी दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बुधवार रात राष्ट्र के नाम संबोधन ने वैश्विक बाजारों में एक बार फिर बेचैनी बढ़ा दी। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि ईरान युद्ध अब अंतिम चरण में पहुंच रहा है, लेकिन इसी के साथ उन्होंने अगले 2-3 हफ्तों तक “extremely hard” हमले जारी रखने की चेतावनी भी दे दी। यही डबल मैसेज बाजारों को सबसे ज्यादा डरा गया—एक तरफ युद्ध खत्म होने की बात, दूसरी तरफ और तेज हमलों का संकेत। इसके तुरंत बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि नौसेना लगभग खत्म है, वायुसेना तबाह है और आईआरजीसी का कंट्रोल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने यह भी साफ कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द नहीं खुला तो और सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिसमें ईरान के पावर प्लांट्स और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले भी शामिल हो सकते हैं।

बाजार में डर, शेयरों में बिकवाली

ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई बाजारों में तुरंत दबाव देखने को मिला। निवेशकों को डर है कि अगर युद्ध और लंबा खिंचता है तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी आशंका में अमेरिकी फ्यूचर्स फिसले, यूरोपीय बाजार टूटे और एशियाई शेयर बाजारों में भी बिकवाली बढ़ गई। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के लगातार विरोधाभासी बयानों—कभी युद्ध खत्म होने की बात, कभी बड़े हमलों की धमकी—से बाजारों में अनिश्चितता सबसे ज्यादा बढ़ रही है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

भारत के लिए यह स्थिति ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि देश अपनी बड़ी तेल जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है। अगर तेल 105 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो महंगाई बढ़ सकती है, रुपये पर दबाव आ सकता है और शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। गिफ्ट निफ्टी में भी कमजोरी के संकेत मिले हैं, जिससे Sensex और Nifty पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले 2-3 हफ्तों में हालात नहीं सुधरे तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर और गहरा हो सकता है।

फिलहाल होर्मुज संकट अभी भी बरकरार है और समुद्री यातायात बेहद सीमित बना हुआ है। निवेशक अब इस बात पर नजर लगाए बैठे हैं कि अमेरिका-ईरान के बीच कोई डील होती है या अगले कुछ हफ्तों में सैन्य कार्रवाई और तेज होती है। यही अनिश्चितता फिलहाल वैश्विक बाजारों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।

news desk

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