लोकसभा में मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का नया अध्याय शुरू हुआ, जिसमें विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
विपक्ष ने स्पीकर पर निष्पक्षता से दूर रहने और सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने सभी आरोपों को खारिज किया।इस दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने नरवणे की किताब का जिक्र किया, जिससे संसद में हंगामा बढ़ गया। बढ़ते हंगामे को देखते हुए स्पीकर की कुर्सी पर मौजूद बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्पीकर का पद निष्पक्ष होना चाहिए और किसी भी तरह का पक्षपात स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष की आवाज़ दबाई जाती है और नेताओं को बोलने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाते। गौरव ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि संसद की मर्यादा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए लाया गया है।
इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने गौरव गोगोई के आरोपों का खंडन किया और कहा कि स्पीकर का कार्यालय हमेशा चालू रहता है और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का गलत अर्थ लगाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष के आरोप वास्तविकता से परे हैं।
वहीं, कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति पर चिंता जताई और कहा कि इससे सदन में संवैधानिक अंतर पैदा हुआ है। इसके जवाब में सरकार की ओर से रविशंक प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया।
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हंगामा बढ़ता देख बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने बहस को 2 बजे तक स्थगित कर दिया। उन्होंने बाद में बताया कि स्पीकर ने विपक्ष के प्रस्ताव पर बहस के लिए पर्याप्त समय और प्रक्रिया की उदारता दिखाई है। बहस के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
इस विवाद के बाद संसद में विपक्ष और सरकार के बीच लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कार्यवाही की पारदर्शिता को लेकर बहस और भी तेज हो गई है।