नई दिल्ली। देश में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की किल्लत का डर अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। केंद्र सरकार ने इस मोर्चे पर बड़ी राहत देते हुए नेचुरल गैस की सप्लाई और आवंटन पर लगाए गए सभी ‘इमरजेंसी कंट्रोल’ (आपातकालीन नियंत्रण) वापस ले लिए हैं। सरकार के इस कदम से साफ है कि देश में अब गैस का पर्याप्त स्टॉक है और बाजार सामान्य रूप से काम करने के लिए तैयार है।
क्यों लगाया गया था नियंत्रण?
इसी साल मार्च में जब वैश्विक और घरेलू स्तर पर गैस की कमी की आशंका गहराने लगी थी, तब सरकार ने एक विशेष प्रावधान लागू किया था। इसके तहत प्राकृतिक गैस के वितरण का सीधा कंट्रोल सरकार ने अपने हाथ में ले लिया था।
उद्देश्य यह था कि अगर भारी किल्लत होती है, तो सबसे पहले सीएनजी-पीएनजी (CNG-PNG), खाद (Fertilizer) और बिजली उत्पादन जैसे बेहद जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सके, ताकि आम जनता की जेब और जरूरी सेवाओं पर इसका सीधा असर न पड़े।
अब क्या बदला? (नया एंगल: बाजार की मजबूती)
सरकार का यह ताजा फैसला देश की मजबूत होती ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को दर्शाता है। इस फैसले के पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
- घरेलू उत्पादन में सुधार: देश के भीतर प्राकृतिक गैस के उत्पादन में तेजी आई है।
- मजबूत आयात और वितरण: विदेशी बाजारों से गैस का आयात और देश के भीतर उसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क अब पूरी तरह सुचारू हो चुका है।
- संकट का कोई खतरा नहीं: सरकार के अनुसार, निकट भविष्य में गैस की कमी या किसी बड़े संकट की कोई आशंका नहीं है।
बड़ा बदलाव: इमरजेंसी कंट्रोल हटने के बाद अब गैस का आवंटन किसी सरकारी कोटे या आपातकालीन प्राथमिकताओं के आधार पर नहीं, बल्कि बाजार की सामान्य मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) के नियमों के तहत होगा।
उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं इसके मायने?
इस फैसले से न केवल औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे मैन्युफैक्चरिंग और पावर प्लांट्स) को अपनी जरूरत के मुताबिक आसानी से गैस मिल सकेगी, बल्कि बाजार में स्थिरता आने से सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव की आशंका कम होगी। यह कदम भारतीय ऊर्जा बाजार के प्रति निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करेगा।