नई दिल्ली / प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर मंडरा रहा गिरफ्तारी का तात्कालिक खतरा अब पूरी तरह टल चुका है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने प्रयागराज के बहुचर्चित पॉक्सो (POCSO) मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सिरे से खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि हाईकोर्ट का आदेश विस्तृत और तथ्यों पर आधारित है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
यह पूरा मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक एफआईआर (FIR) से जुड़ा है, जिसने देश के धार्मिक और कानूनी हलकों में हड़कंप मचा दिया था।
मार्च 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत मंजूर की थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में उन झोल (विसंगतियों) को उजागर किया था, जिनके आधार पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी राहत बरकरार रखी है:
शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि पॉक्सो जैसे मामलों में अग्रिम जमानत केवल ‘दुर्लभ’ परिस्थितियों में मिलनी चाहिए और इससे गवाहों को खतरा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज तो कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई जमानत की कड़े शर्तों का शत-प्रतिशत पालन होना चाहिए:
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम रुख के बाद अब इस मामले की कानूनी दिशा साफ हो गई है और पुलिस बिना किसी दबाव के अपनी रूटीन जांच पूरी करेगी।
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