ज़रा सोचिए, अगर कोई आपको बताए कि वैज्ञानिकों ने फ्लू वायरस को इंसानी कोशिकाओं में घुसते हुए लाइव पकड़ लिया—वो भी हाई-रिज़ॉल्यूशन में—तो यह किसी साइंस-फिक्शन जैसा लगेगा। लेकिन यह बिल्कुल सच है! पहली बार शोधकर्ताओं ने वायरस को कोशिका की सतह पर ‘सर्फिंग’ करते हुए देखा है, जैसे वह सही एंट्री पॉइंट ढूंढ रहा हो।
नई तकनीक ने खोला वायरस-कोशिका इंटरैक्शन का राज
यह कमाल किया है स्विट्जरलैंड के ETH ज़्यूरिख यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर योहेई यामाउची और उनकी इंटरनेशनल टीम ने। स्विट्जरलैंड और जापान के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक सुपर-एडवांस्ड माइक्रोस्कोपी तकनीक बनाई है—ViViD-AFM… यह एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोपी और फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोपी का कॉम्बिनेशन है, जो जीवित कोशिकाओं को बिना नुकसान पहुंचाए उनकी हर एक्टिव मूवमेंट को लाइव दिखाती है।
शोध में साफ हुआ कि कोशिकाएं वायरस को बस चुपचाप आने नहीं देतीं। वायरस पहले रिसेप्टर्स से जुड़ता है, फिर सतह पर स्लाइड करता हुआ परफेक्ट एंट्री स्पॉट तलाशता है। जैसे ही वह जगह मिलती है, कोशिका क्लैथ्रिन नाम के प्रोटीन की मदद से एक छोटा-सा गड्ढा बनाती है जो आगे चलकर वेसिकल बन जाता है और वायरस को अंदर खींच लेता है। अगर वायरस भागने की कोशिश करे, तो कोशिका अपनी झिल्ली की मूवमेंट से पकड़ और मजबूत कर लेती है।
“वायरस और कोशिका का रिश्ता एक डांस की तरह”
प्रोफेसर यामाउची ने इस प्रक्रिया को एक सुंदर उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, “हमारे शरीर में वायरस और कोशिका का इंटरैक्शन एक तरह का डांस है।”
यह खोज भविष्य की एंटीवायरल दवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। क्योंकि अब वैज्ञानिक रीयल-टाइम में देख सकेंगे कि कौन-सी दवा वायरस को रोकने में कितनी असरदार है। यह तकनीक सिर्फ फ्लू वायरस ही नहीं, बल्कि दूसरे वायरसों और वैक्सीन रिसर्च के लिए भी गेम-चेंजर बन सकती है।
ताज़ा पब्लिश हुई यह स्टडी आने वाले समय में फ्लू इनफेक्शन की समझ को पूरी तरह बदल सकती है—खासकर तब, जब मौसमी फ्लू के केस लगातार बढ़ रहे हों। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक आगे और कई राज खोलेगी।