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नीट आंदोलन में ‘फास्टिंग’ बनाम ‘फिटनेस’! वांगचुक के 9 दिन के अनशन के बीच दीपके ने क्यों कहा – “भूखे मत मरो”

NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली का जंतर-मंतर इस वक्त देश के सबसे बड़े प्रोटेस्ट हब में बदल चुका है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद पर अड़ी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और देश भर से आए स्टूडेंट्स का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस हाई-वोल्टेज प्रदर्शन के बीच, पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक और CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके के बीच ‘अनशन’ की स्ट्रेटेजी को लेकर एक दिलचस्प डिबेट छिड़ गई है।

लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जहां एक तरफ आक्रोश है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन को आगे बढ़ाने के तरीकों को लेकर मतभेद भी खुलकर सामने आने लगे हैं। सोशल मीडिया पर अपनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के जरिए सनसनी मचाने वाले अभिजीत दीपके ने जमीनी स्तर पर बढ़ते तनाव को देखते हुए छात्रों से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। दीपके का एक बयान इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह छात्रों को अनशन से दूर रहने की हिदायत दे रहे हैं।

अभिजीत दीपके का क्या कहना है?

“मैंने तो सबको बहुत समझाया है, प्लीज आप लोग भूख हड़ताल मत कीजिए। अगर हर कोई हंगर स्ट्राइक पर बैठ जाएगा… तो इस लंबी लड़ाई को ग्राउंड पर मैनेज कौन करेगा? सरकार को बच्चों की जान की कोई परवाह नहीं है; अगर परवाह होती, तो पेपर लीक होते ही इस्तीफा आ चुका होता। सोनम सर को भूख हड़ताल का पुराना एक्सपीरिएंस है, वह खुद को संभाल सकते हैं। लेकिन बाकी छात्रों को अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए, हमें इस लंबी जंग के लिए खुद को फिट रखना होगा।”

‘ठूंस-ठूंस कर खाने’ वालों पर भड़के वांगचुक

इस बड़े आंदोलन को अपना पूरा सपोर्ट दे रहे सोनम वांगचुक पिछले 9 दिनों से बिना अन्न-जल के धरने पर डटे हुए हैं। लगातार अनशन की वजह से उनका वजन तेजी से घटा है, जिसने समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, वांगचुक जंतर-मंतर पर जुटने वाले प्रदर्शनकारियों के ढुलमुल रवैये से काफी निराश दिखे। उन्होंने हाल ही में एक तीखा बयान देते हुए कहा कि जहां कुछ लोग देश के युवाओं के हक के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर अनशन कर रहे हैं, वहीं प्रोटेस्ट में शामिल होने आए कई लोग वहां ‘ठूंस-ठूंस कर खा रहे हैं’।

वांगचुक ने लोगों से अपील की है कि वे वहां केवल रोने-धोने या खाने-पीने के लिए न आएं, बल्कि कम से कम एक-एक दिन का उपवास रखें। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि जो लोग ऐसे गंभीर मौकों पर भी सिर्फ खाने में मशगूल हैं, वे मोटे होंगे, बीमार पड़ेंगे और अनशन करने वालों से पहले ही दुनिया से चले जाएंगे। उनका साफ मकसद आंदोलन में गंभीरता, अनुशासन और सिंसियॉरिटी को लाना है।

आंदोलन के दो पहलू

अभिजीत दीपके का मानना है कि यह प्रोटेस्ट एक ‘मैराथन’ की तरह लंबा खिंचेगा, इसलिए व्यवस्था संभालने के लिए छात्रों का फिट और एक्टिव रहना जरूरी है। वहीं, वांगचुक चाहते हैं कि लोग इस आंदोलन में पूरा त्याग और समर्पण दिखाएं।

दीपके के अनुसार, अगर पूरी भीड़ ही भूख हड़ताल पर बैठ जाएगी, तो लॉजिस्टिक्स, मीडिया और ग्राउंड लेवल की व्यवस्थाओं को संभालना पूरी तरह नामुमकिन हो जाएगा।

news desk

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