लखनऊ. देश में चल रही मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की कार्यशैली, मतदाता सूची से नाम कटने की आशंकाओं और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर बढ़ते दबाव को लेकर तीखी बहस जारी है.
बिहार में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके कारण BLO कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ा है.
गोंडा जिले में BLO और शिक्षक विपिन यादव की ज़हर खाने से मौत ने इस बहस को और तेज कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यादव SIR कार्य और अधिकारियों के दबाव से परेशान थे.उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके.
परिवार के एक सदस्य ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों द्वारा OBC वर्ग के वोट काटने का दबाव बनाया जा रहा था, और ऐसा न करने पर निलंबन व पुलिस कार्रवाई की धमकी दी गई थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
BLO पर काम का बोझ बढ़ने के आरोप
विभिन्न जिलों से यह शिकायतें सामने आई हैं कि BLO पर लगातार दबाव, समयसीमा का तनाव और स्थानीय अधिकारियों की सख़्ती की वजह से कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है.कई स्थानों पर BLO और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने की खबरें भी आई हैं.
विपिन यादव की मौत को लेकर विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा है. यूपी कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए इसे “सियासी हत्या” बताया और आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के बहाने BLO कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है. पार्टी ने यह भी कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न के बावजूद मामले को “पारिवारिक तनाव” बताकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है. सरकार और चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अब तक कोई सीधा जवाब नहीं दिया है।
SIR प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायतें मिलने से आम मतदाताओं में भी चिंता बढ़ी है. सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या चुनाव आयोग अपनी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने में सक्षम है.
फ़िलहाल गोंडा मामले की जांच प्रशासन द्वारा जारी है. BLOs पर कार्यभार, मतदाता सूची संशोधन की पारदर्शिता, और SIR प्रक्रिया की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार है.वोटर-लिस्ट अपडेटिंग लोकतंत्र का अहम हिस्सा है — लेकिन उसकी जवाबदेही, पारदर्शिता और इंसानियत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है
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