Trending News

पढ़ेगा नहीं तो कैसे बढ़ेगा इंडिया? पिछले 5 साल में 65.7 लाख बच्चों ने छोड़ा स्कूल, गुजरात टॉप पर.

नई दिल्ली। ‘स्कूल छोड़ेगा इंडिया तो कैसे बढ़ेगा इंडिया’ ये स्लोगन सवाल भी है और शिक्षा के क्षेत्र में आ रहे संकट को भी बता रहा है. पिछले पांच वर्षों में 65.7 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है। ये आंकड़े भयावह है और भविष्य के लिए बड़े संकट की चेतावनी भी। जब पूरी दुनिया में शिक्षा का स्तर बढ़ता जा रहा है, एआई नौकरियों के लिए समस्या खड़ी कर रही है ऐसे समय में भारत में लाखों बच्चे स्कूल ड्रॉप आउट हो रहे हैं।

ये आँकड़े महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सवित्री ठाकुर ने कांग्रेस सांसद रेनुका चौधरी के एक प्रश्न के जवाब में पेश किए। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल छोड़ने वालों में से 29.8 लाख किशोरियाँ हैं। ये आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं, क्योंकि किसी भी देश की तरक्की में शिक्षा की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।

इतना ही नहीं, ऐसे आंकड़े इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि सरकार की शिक्षा योजनाएँ पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। अलग-अलग राज्यों में स्थिति काफी असमान है और बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा व्यवस्था से बाहर होते जा रहे हैं।

गुजरात में सबसे अधिक ड्रॉपआउट

राज्य स्तर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025–26 में सबसे अधिक स्कूल छोड़ने वाले बच्चे गुजरात में दर्ज किए गए। राज्य ने कुल 2.4 लाख छात्रों की पहचान की, जो अब स्कूल नहीं जा रहे थे। इनमें से 1.1 लाख लड़कियाँ किशोरावस्था आयु वर्ग में थीं।

गुजरात में ड्रॉपआउट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2024 में जहाँ राज्य में 54,541 ड्रॉपआउट थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 2.4 लाख हो गई, यानी 340 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी। और सबसे हैरानी की बात 2024 में जहां केवल 1 लड़की स्कूल से बाहर दर्ज हुई थी, वहीं 2025 में यह संख्या 1.1 लाख हो गई।

असम और यूपी की स्थिति

गुजरात के बाद असम का नंबर आता है, जहां 1,50,906 बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए, जिनमें 57,409 लड़कियाँ शामिल थीं। वहीं उत्तर प्रदेश में 99,218 बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं, जिनमें 56,462 लड़कियां हैं। केंद्र ने “ब्रिंगिंग चिल्ड्रेन बैक टू स्कूल” अभियान भी शुरू किया है और राज्यों, स्कूल प्रबंधन समितियों और स्थानीय निकायों से मिलकर ऐसे बच्चों का पता लगाने और पुनः नामांकन सुनिश्चित करने को कहा है।

केंद्र सरकार ने उन कई चुनौतियों की सूची दी है जिनकी वजह से लड़कियाँ स्कूल छोड़ने पर मजबूर होती हैं। इनमें प्रवासन (migration), गरीबी, घरेलू जिम्मेदारियाँ, बाल श्रम और सामाजिक दबाव शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि ये समस्याएँ अक्सर लड़कियों को अपनी शिक्षा पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देने के लिए मजबूर कर देती हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha) के तहत उठाए गए कई कदमों का उल्लेख किया।

इन उपायों में सीनियर सेकेंडरी स्तर तक नए स्कूल खोलना, अधिक कक्षाएँ जोड़ना, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का विस्तार, और मुफ़्त यूनिफ़ॉर्म, पाठ्यपुस्तकें और परिवहन सहायता देना शामिल हैं।

संसद को यह भी बताया गया कि 2024–25 में समग्र शिक्षा योजना के तहत 56,694.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें से 34,45,820 करोड़ रुपये केंद्र द्वारा दिए गए।

news desk

Recent Posts

“आप भी आइए अयोध्या…” अखिलेश की चुनौती पर सीएम योगी का पलटवार, बलरामपुर में दी सीधी चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अयोध्या का रण सबसे बड़ा केंद्र बनता…

8 hours ago

लखनऊ का सिद्धपीठ माँ चंद्रिका देवी मंदिर बंद! मंदिर में जलभराव से प्रशासन का बड़ा फैसला, जानिए कब खुलेंगे कपाट

नवरात्रि और अमावस्या के पावन अवसर पर जहाँ माँ चंद्रिका देवी के दरबार में लाखों…

8 hours ago

घाघरा-चोली से लेकर मोनोक्रोम एथनिक तक, जानिए क्या है इस बार ट्रेंड में

नवरात्रि अब सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि फैशन, म्यूजिक और लाइफस्टाइल का ऐसा रंगीन…

9 hours ago

पहली बार भारत आ रही जिम्बाब्वे की महिला टीम, स्मृति मंधाना संभालेंगी टीम इंडिया की कमान!

भारतीय महिला क्रिकेट टीम अपने आगामी और बेहद व्यस्त इंटरनेशनल सीजन की शुरुआत एक ऐतिहासिक…

10 hours ago

रुपये को गिरने से बचाने के लिए RBI का ‘मास्टरस्ट्रोक’, विदेशी मुद्रा बाजार के बदले नियम!

कमजोर होते रुपये को सहारा देने और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के…

11 hours ago

स्मार्टफोन की लत बनी मानसिक बीमारी: 13 साल के बच्चे का 12 घंटे गेम खेलना डराने वाला सच, जानिए कैसे करें बचाव

आज के डिजिटल दौर में बच्चों से लेकर बड़ों तक के हाथ में स्मार्टफोन आम…

12 hours ago