कोलकाता, 16 अक्टूबर 2025 – अवैध रेत खनन और तस्करी के काले कारोबार पर ED ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया. केंद्रीय जांच एजेंसी ने रेत तस्करी रैकेट से जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों और व्यवसायों को निशाना बनाते हुए कुल 8 स्थानों पर एक साथ तलाशी ली, जिसमें व्यापारिक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और संपत्तियों की बारीकी से जांच की जा रही है. ED की टीमें मुख्य रूप से कोलकाता के व्यस्त बेंटिंक स्ट्रीट इलाके, झाड़ग्राम जिले के गोपीबल्लवपुर में स्थित कार्यालयों, पश्चिम मिदनापुर जिले के लालगढ़ क्षेत्र और पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल में एक प्रमुख व्यवसायी के आवास पर सक्रिय रहीं. सूत्रों के अनुसार, आसनसोल के मुरगाशोल इलाके में रहने वाले व्यवसायी मनीष बगड़िया के आवास पर विशेष फोकस रहा, जो लंबे समय से दक्षिण बंगाल के कई घाटों पर रेत व्यापार से जुड़े बताए जाते हैं. छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने खदानों से रेत निकासी के समय भी निरीक्षण किया, जिससे कारोबारियों में हड़कंप मच गया.
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह छापे अवैध रेत खनन की हमारी चल रही जांच का हिस्सा हैं. हम रैकेट से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को उजागर करने पर केंद्रित हैं. अनुमान है कि इस तस्करी में सैकड़ों करोड़ रुपये का काला धन लगा हुआ है, जो बीमा कंपनियों और अन्य व्यवसायों में निवेश किया गया है” ईडी के अनुसार, यह दूसरी बार है जब राज्य में रेत तस्करी से जुड़े मामलों पर कार्रवाई हो रही है. इससे पहले 8 सितंबर 2025 को कोलकाता और आसपास के 22 स्थानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें लाखों रुपये नकद और महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए थे. उस अभियान में झाड़ग्राम जिले के प्रमुख आरोपी शेख जहांरुल को अवैध रेत निकासी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. ED की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही है, जिसमें संदिग्धों के बैंक खातों, संपत्तियों और व्यापारिक लेन-देन की गहन जांच शामिल है. जांच एजेंसी ने कई व्यक्तियों की पहचान कर ली है और अब पैसे के स्रोत का पता लगाने पर जोर दे रही है.