मिडिल ईस्ट इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। गुरुवार सुबह दक्षिणी ईरान में आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने न केवल धरती को हिलाया, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी ‘सुनामी’ ला दी है। यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर है और युद्ध की आशंका 90% तक बढ़ गई है।
भूकंप के झटके और परमाणु टेस्ट का शक
जर्मन भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र (GFZ) के अनुसार, भूकंप का केंद्र दक्षिणी ईरान के मोह्र (Mohr) इलाके में जमीन से मात्र 10 किमी नीचे था। कम गहराई और फार्स-बुशहर प्रांत जहाँ ईरान के परमाणु संयंत्र हैं उसमें आए इन झटकों ने सोशल मीडिया पर ‘सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्ट’ की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि सीस्मोलॉजिस्ट इसे प्राकृतिक हलचल बता रहे हैं, लेकिन Axios की रिपोर्ट और ईरान की रहस्यमयी तालेघन-2 (Taleghan-2) फैसिलिटी पर बढ़ती हलचल ने दुनिया के शक को गहरा कर दिया है।
ट्रंप का ‘शनिवार’ वाला अल्टीमेटम
पिछले कई दिनों से ओमान की मध्यस्थता में चल रही परमाणु वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अड़ियल रुख से बेहद नाराज हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि परमाणु समझौते पर जल्द सहमति नहीं बनी, तो ईरान को “गंभीर परिणाम” भुगतने होंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप शनिवार तक संभावित सैन्य कार्रवाई पर बड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका के पास अब ‘सभी विकल्प’ खुले हैं।
इजरायल भी अलर्ट पर
अमेरिकी न्यूज पोर्टल Axios ने दावा किया है कि हालात अब कूटनीति के हाथ से निकलकर युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप के एक करीबी सलाहकार के अनुसार, आने वाले हफ्तों में सैन्य टकराव की संभावना 90 प्रतिशत है। इस बीच, इजरायल ने भी अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष शुरू हुआ, तो यह कई हफ्तों तक चलने वाला एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध बन सकता है।
झुकने को तैयार नहीं तेहरान
इतने भारी दबाव के बावजूद ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने हुंकार भरते हुए कहा है कि वे किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। ईरान ने वार्ता की मेज पर अपनी ‘लाल रेखा’ (Red Lines) खींच दी है:
बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे पर होगी। मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय गुटों (जैसे हिजबुल्लाह/हमास) के समर्थन पर कोई चर्चा नहीं होगी। इजरायल से जुड़े मुद्दों पर ईरान कोई समझौता नहीं करेगा।