दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई. इस बार यह पुरस्कार वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है. इससे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं, क्योंकि कई लोग इस बार ट्रंप के इस पुरस्कार के हकदार होने की बात कर रहे थे. नोबेल शांति पुरस्कार हर साल नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी द्वारा उन लोगों या संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने शांति को बढ़ावा देने, देशों के बीच भाईचारे को मजबूत करने और समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए होते हैं. यह पुरस्कार हमेशा किसी न किसी चौंकाने वाली घोषणा के साथ आता है, इस बार भी मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की खबर ने कई लोगों को हैरान कर दिया है.
कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो?
मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को वेनेजुएला में हुआ था. वह वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और औद्योगिक इंजीनियर हैं. 2002 में उन्होंने ‘सूमाते’ नामक वोट निगरानी संगठन की स्थापना की, जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए काम करता है. इसके अलावा, वह ‘वेंटे वेनेजुएला’ पार्टी की राष्ट्रीय समन्वयक भी हैं. मचाडो ने 2011 से 2014 तक वेनेजुएला की नेशनल असेंबली में सदस्य के रूप में सेवा दी. उनकी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता की वजह से 2018 में उन्हें बीबीसी की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में शामिल किया गया, जबकि 2025 में टाइम मैगजीन ने भी उन्हें दुनिया की 100 प्रभावशाली शख्सियतों में गिना. निकोलस मादुरो सरकार ने उन्हें देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था. 2023 में राजनीतिक अयोग्यता के बावजूद, उन्होंने विपक्षी प्राथमिक चुनाव जीता, लेकिन बाद में उनकी जगह कोरिना योरिस को उम्मीदवार बनाया गया.
ट्रंप को धीरे से लगा जोर का झटका?
इस बार के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सपने सजोएं थे. ट्रंप कई देशों के जरिए लॉबिंग भी कर रहे थे. उनका दावा था कि उन्होंने 8 युद्धों को खत्म कर दुनिया में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ट्रंप के इस दावे की सूची में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के प्रयास का भी जिक्र है. जिसका ऐलान वो कई मर्तबा कर चुके हैं. इसके अलावा, हाल ही में गाजा और इजराइल के बीच हुए समझौते को भी उन्होंने अपने शांति प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया. इन्हीं कारणों से ट्रंप का मानना था कि इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार वही हैं.
क्या ट्रंप को चिढ़ाने के लिए मारिया को दिया गया नोबेल?
दरअसल, वेनेजुएला और अमेरिका के बीच हमेशा से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं. दोनों देशों के बीच अज भी राजनीतिक मतभेद और नोकझोंक बने रहते हैं, फिलहाल दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. ऐसे में इस बार का शांति नोबेल पुरस्कार बेनेजुएला की शख्सियत को मिलना ट्रंप और उसके समर्थकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस पुरस्कार ने अमेरिका-वेनेजुएला के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों में और इजाफा कर दिया है.