नई दिल्ली। भारत की राजनीति में आर्थिक ताकत अब केवल भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय दलों तक सीमित नहीं रह गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी ताजा वित्तीय वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने चंदा जुटाने के मामले में कई राष्ट्रीय दलों को पछाड़ दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (AAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) जैसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां भी चंदा इकट्ठा करने की दौड़ में शीर्ष 8 क्षेत्रीय दलों से पीछे छूट गई हैं।
ADR के आंकड़ों के अनुसार, ₹20,000 से अधिक के घोषित चंदे के मामले में क्षेत्रीय दलों की तिजोरी में भारी इजाफा दर्ज किया गया है:
ADR रिपोर्ट में सामने आया कि कुल क्षेत्रीय चंदे का 79.9% हिस्सा केवल 5 क्षेत्रीय पार्टियों—DMK, AITC (तृणमूल कांग्रेस), YSRCP, TDP और AIADMK—के खाते में गया, जिनकी कुल राशि ₹840.12 करोड़ रही।
तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ₹365.78 करोड़ के साथ शीर्ष स्थान पर रही। वहीं पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (AITC) ₹184.96 करोड़ के साथ दूसरे नंबर पर रही।
क्षेत्रीय दलों की इस आर्थिक मजबूती के पीछे देश के बड़े व्यावसायिक घरानों और इलेक्टोरल ट्रस्टों का सीधा हाथ है:
राज्यों के आधार पर सबसे अधिक चंदा दिल्ली (₹433.77 करोड़), पश्चिम बंगाल (₹172.93 करोड़) और महाराष्ट्र (₹158.80 करोड़) से प्राप्त हुआ।
रिपोर्ट ने चंदे की पारदर्शिता पर गंभीर चिंताएं जताई हैं:
ADR के अनुसार, देश के 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों में से 33 दलों ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को समय पर अपनी चंदे की रिपोर्ट जमा नहीं की है। इनमें जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC), असम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और टिपरा मोथा जैसे प्रमुख दल शामिल हैं।
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