सियासी

राजनीतिक चंदे में क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा: AAP-BSP जैसी राष्ट्रीय पार्टियों से आगे निकले 8 क्षेत्रीय दल, ADR रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली। भारत की राजनीति में आर्थिक ताकत अब केवल भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय दलों तक सीमित नहीं रह गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी ताजा वित्तीय वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने चंदा जुटाने के मामले में कई राष्ट्रीय दलों को पछाड़ दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (AAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) जैसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां भी चंदा इकट्ठा करने की दौड़ में शीर्ष 8 क्षेत्रीय दलों से पीछे छूट गई हैं।

क्षेत्रीय दलों के चंदे में 198% का उछाल

ADR के आंकड़ों के अनुसार, ₹20,000 से अधिक के घोषित चंदे के मामले में क्षेत्रीय दलों की तिजोरी में भारी इजाफा दर्ज किया गया है:

  • वित्तीय वर्ष 2023-24: क्षेत्रीय दलों को कुल ₹347.69 करोड़ का चंदा प्राप्त हुआ था।
  • वित्तीय वर्ष 2024-25: यह राशि बढ़कर ₹1,051.56 करोड़ हो गई, जो लगभग 198% की वृद्धि दर्शाती है।
  • दान की संख्या: 2023-24 में मिले 2,861 दानों के मुकाबले 2024-25 में 5,297 दान दर्ज किए गए, जिसमें 85% का उछाल देखा गया।

शीर्ष 5 क्षेत्रीय दलों का 80% चंदे पर कब्जा

ADR रिपोर्ट में सामने आया कि कुल क्षेत्रीय चंदे का 79.9% हिस्सा केवल 5 क्षेत्रीय पार्टियों—DMK, AITC (तृणमूल कांग्रेस), YSRCP, TDP और AIADMK—के खाते में गया, जिनकी कुल राशि ₹840.12 करोड़ रही।

तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ₹365.78 करोड़ के साथ शीर्ष स्थान पर रही। वहीं पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (AITC) ₹184.96 करोड़ के साथ दूसरे नंबर पर रही।

कॉर्पोरेट घरानों और इलेक्टोरल ट्रस्टों का बड़ा योगदान

क्षेत्रीय दलों की इस आर्थिक मजबूती के पीछे देश के बड़े व्यावसायिक घरानों और इलेक्टोरल ट्रस्टों का सीधा हाथ है:

  1. कॉर्पोरेट फंडिंग: वित्त वर्ष 2024-25 में क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का 61.33% (₹644.93 करोड़) कॉर्पोरेट एवं बिजनेस घरानों से प्राप्त हुआ।
  2. प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट: इस ट्रस्ट ने दो वित्तीय वर्षों में कुल ₹434 करोड़ का चंदा क्षेत्रीय दलों को दिया, जिसमें से ₹253.50 करोड़ अकेले 2024-25 में दिए गए।
  3. टाइगर एसोसिएट्स: इसने 2024-25 के दौरान पांच किस्तों में ₹160 करोड़ का चंदा दिया।

राज्यों के आधार पर सबसे अधिक चंदा दिल्ली (₹433.77 करोड़), पश्चिम बंगाल (₹172.93 करोड़) और महाराष्ट्र (₹158.80 करोड़) से प्राप्त हुआ।

पारदर्शिता पर सवाल: कैश, अज्ञात डोनर्स और बिना PAN का चंदा

रिपोर्ट ने चंदे की पारदर्शिता पर गंभीर चिंताएं जताई हैं:

  • अज्ञात डोनर्स में 4470% की वृद्धि: बिना नाम वाले दानकर्ताओं से मिलने वाला चंदा 2023-24 के ₹6.62 करोड़ से उछलकर 2024-25 में ₹302.67 करोड़ पहुंच गया।
  • नकद चंदे का खेल: कैश में प्राप्त चंदा ₹6.54 करोड़ से बढ़कर ₹301.44 करोड़ हो गया। DMK को मिले ₹365.78 करोड़ में से ₹300.64 करोड़ (82%) ऐसे डोनर्स से थे, जिनकी पहचान सार्वजनिक नहीं है और इसे ₹20,000 से कम के नकद चंदे के रूप में दिखाया गया।
  • बिना PAN विवरण: बिना PAN डिटेल्स वाले चंदे का मूल्य बढ़कर ₹329.58 करोड़ हो गया, जो कुल चंदे का 31.3% है।
  • AITC का अधूरी जानकारी वाला चंदा: तृणमूल कांग्रेस को चेक/DD के माध्यम से मिले ₹184.08 करोड़ के चंदे में दानदाताओं के पते और PAN जैसी जानकारियां अधूरी पाई गईं।

33 क्षेत्रीय दलों ने नहीं सौंपी रिपोर्ट

ADR के अनुसार, देश के 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों में से 33 दलों ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को समय पर अपनी चंदे की रिपोर्ट जमा नहीं की है। इनमें जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC), असम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और टिपरा मोथा जैसे प्रमुख दल शामिल हैं।

news desk

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