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‘200% सीएम बनेंगे डीके’ – समर्थक विधायकों ने दिल्ली पर बढ़ाया प्रेशर! कर्नाटक के ‘नाटक’ पर बीजेपी की जाल बिछाने की तैयारी?

देश की राजनीति में कांग्रेस की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं. बिहार चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब कर्नाटक में बगावत ने पार्टी आलाकमान के सिर पर बल ला दिया है. डीके समर्थक विधायक विधायक इकबाल हुसैन ने कहा कि ‘मैं आज भी वही कह रहा हूं… डी.के. शिवकुमार का सीएम बनना 200% गारंटीड है. उन्होंने याद दिलाया कि आलाकमान ही अंतिम निर्णय लेगा, लेकिन ये भी जोड़ा कि सीएम बनने की ये चाबी पांच-छह वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई सीक्रेट डील के पास है, और फैसला वहीं से आना है.’

डीके ब्रिगेड का ‘दिल्ली अटैक’!

पिछले कुछ दिनों से डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने दिल्ली में डेरा डालकर हाई कमान पर सीधा दबाव बनाना शुरू कर दिया है. ये लॉबिंग दर्शाती है कि डीकेएस खेमा अब निर्णायक लड़ाई के मूड में है. इस पूरे विवाद की जड़ वो ‘गोपनीय समझौता’ है, जिसके तहत कथित तौर पर दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के कार्यकाल पर सहमति बनी थी. खुद डीकेएस भी बार-बार कहते रहे हैं कि ये फैसला ‘पांच-छह नेताओं के बीच हुई ख़ुफ़िया समझ’ का हिस्सा है.

दिलचस्प बात तो ये है कि इतना दबाव होने के बावजूद, डीकेएस ने सार्वजनिक रूप से इस लॉबिंग से दूरी बनाए रखी है, जिससे ये कहा जा सकता है कि ये सब चीज़े उनकी जानकारी के बिना हो रहा है.

कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होते ही, मुख्यमंत्री पद के लिए हुए कथित ‘सीक्रेट डील’ की चिंगारी फिर भड़क उठी है, जिसने आलाकमान को भी बेचैन कर दिया है. मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच चल रही ‘कुर्सी की जंग’ अब निर्णायक मोड़ पर पहुच गई है. इस बढ़ते राजनीतिक ड्रामे पर जल्द पर्दा डालने के लिए, कांग्रेस का हाई कमान अब एक्शन मोड में आ गया है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी जल्द ही सिद्दारमैया और डीकेएस दोनों को दिल्ली बुलाकर मामले का पटाक्षेप करेगी, ताकि इस अंदरूनी खींचतान को जड़ से खत्म किया जा सके.

सिद्दारमैया का सख्त संदेश: ‘ये नाटक बंद हो!’

वहीं, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया इन अटकलों से बुरी तरह भड़के हुए हैं और उन्होंने सीधे हाई कमान को अल्टिमेटम दे दिया है कि इन लगातार उड़ रही सभी अफवाहों को तुरंत ‘लॉक’ किया जाए. उनका तर्क है कि ये अनिश्चितता पार्टी के वर्कर्स को भटका रही है और साथ ही गवर्नमेंट के काम और उसकी छवि को भी खराब कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि विधायक अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान का ही होगा, जिसे वो और शिवकुमार दोनों मानेंगे. वर्तमान में सिद्दारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार खेमा सीधे नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर अड़े है.

कांग्रेस की हलचल पर बीजेपी की नजर

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और शीर्ष नेता राहुल गांधी के लिए ये स्थिति एक बड़ी चुनौती है. कांग्रेस इस चुनौती से निपट भी लेगी, लेकिन कांग्रेस की समस्या बीजेपी है जो इस हलचल के साथ ही अपनी रणनीति बनाना शुरू कर चुकी है. कांग्रेस पहले भी देख चुकी है कि कैसे जरा से मतभेद का फायदा उठा कर बीजेपी उसकी सरकारें गिराती रही है। कांग्रेस इस समय बीजेपी को वो मौका नहीं देना चाहती.

news desk

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