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unjab University Protest: दो यूनिवर्सिटी, दो विवाद और हिंसक प्रदर्शन; अफवाह से कथित रेप तक कैसे बिगड़े हालात

पंजाब में लगातार दो दिनों में दो बड़ी यूनिवर्सिटियां छात्रों के विरोध प्रदर्शन और हिंसा को लेकर चर्चा में आ गईं। पटियाला के राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में सोशल मीडिया पर छात्राओं की मौत और हॉस्टल में भूत होने जैसी अफवाहों के बाद तनाव बढ़ा, जबकि फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा से कथित दुष्कर्म के आरोपों के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया। दोनों मामलों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ और सार्वजनिक तथा विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचना है।

चितकारा यूनिवर्सिटी में सोशल मीडिया अफवाह से बढ़ा तनाव

26 सितंबर की देर रात चितकारा यूनिवर्सिटी में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुप्स पर कुछ दावे तेजी से प्रसारित हुए। इनमें दो छात्राओं की मौत या आत्महत्या और हॉस्टल में भूत होने जैसी बातें शामिल थीं। इन दावों के बाद बड़ी संख्या में छात्र हॉस्टल से बाहर निकल आए और विश्वविद्यालय प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करने लगे।

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि कैंपस में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर कुछ छात्रों की शरारत और उसके बाद सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट सूचनाओं के कारण स्थिति तनावपूर्ण हुई।

विरोध के दौरान पुलिस वाहनों और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय के मुताबिक नियमित कक्षाएं 5 अक्टूबर से दोबारा शुरू होंगी, जबकि शिक्षक और कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों के लिए कैंपस आते रहेंगे।

LPU में कथित रेप के आरोपों के बाद सड़क पर उतरे छात्र

चितकारा यूनिवर्सिटी के घटनाक्रम के अगले दिन फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध शुरू हो गया। यहां एक छात्रा से कथित दुष्कर्म के आरोपों को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि 23 सितंबर को गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ और विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी दिए जाने के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने छात्रों के बयानों के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की है और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है।

हालांकि, LPU प्रशासन ने कैंपस में ऐसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया है और आरोपों को अफवाह तथा गलत सूचना बताया है। पुलिस ने भी जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।

जांच के दौरान CCTV फुटेज, फोरेंसिक सैंपल, कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

LPU में प्रदर्शन ने कब लिया हिंसक रूप?

LPU में विरोध रविवार तड़के गर्ल्स हॉस्टल के आसपास शुरू हुआ। कुछ ही समय में बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन में शामिल हो गए। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की गई और दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे-44 को भी जाम कर दिया गया।

हाईवे बंद होने से यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला गया। शाम को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हाईवे खाली कराने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई।

अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया और पुलिस के कई वाहनों को नुकसान पहुंचा। कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। घटना में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात अधिकारियों ने कही है।

हालात बिगड़ने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। ADGP एमएफ फारूकी के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों की टीम ने कैंपस पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बाद में पुलिस ने हालात नियंत्रण में होने की जानकारी दी।

10 दिनों के लिए LPU में कक्षाएं स्थगित

हिंसक प्रदर्शन के बाद LPU ने छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित करने का फैसला लिया है। मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगली सूचना तक टाल दी गई हैं।

विश्वविद्यालय ने छात्रों को अभिभावकों से सलाह लेकर घर जाने की अनुमति दी है। वहीं, कैंपस में रहने वाले छात्रों को हॉस्टल या अपने आवास में रहने और अनावश्यक गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है।

कैंपस में सुरक्षा बढ़ाने के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई है और फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है। हाईवे पर यातायात सामान्य करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

दोनों मामलों में सोशल मीडिया की भूमिका सवालों के घेरे में

पंजाब की दोनों यूनिवर्सिटियों में सामने आए घटनाक्रम में एक समान बात यह रही कि तनाव तेजी से बढ़ा और सोशल मीडिया तथा छात्रों के बीच प्रसारित सूचनाओं ने स्थिति को प्रभावित किया।

चितकारा मामले में विश्वविद्यालय और पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैली मौत और भूत से जुड़ी बातों को गलत बताया है। वहीं LPU मामले में भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को अफवाह बताया है, जबकि पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अब दोनों मामलों में जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों की वास्तविकता क्या है और विरोध के दौरान हिंसा तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है।

news desk

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