मेरठ: स्मार्टफोन की स्क्रीन पर जीत की तलाश कभी-कभी जिंदगी की हार बन सकती है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मोबाइल गेमिंग के जुनून ने एक हंसते-खेलते युवा की जान ले ली।
कैसे हुई घटना?
22 साल का मोहम्मद कैफ अपने कमरे में घंटों से हेडफोन लगाकर PUBG (BGMI) की दुनिया में डूबा था। गेम के दौरान होने वाली उत्तेजना और ‘डू और डाई’ वाले कॉम्पिटिशन ने उसके शरीर पर ऐसा दबाव बनाया कि वो अचानक बेहोश हो गया।
परिजनों द्वारा तुरंत दिल्ली के अस्पताल ले जाने के बाद पता चला कि गेमिंग के स्ट्रेस के कारण कैफ का ब्लड प्रेशर (BP) 300 के पार चला गया था। इतन ज्यादा प्रेशर को दिमाग सहन नहीं कर सका और नस फटने लगी (ब्रेन हेमरेज) की वजह से इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
‘साइलेंट अटैक’ क्यों कहते हैं डॉक्टर्स?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये सिर्फ एक गेम नहीं बल्कि शरीर के साथ खिलवाड़ है। जब हम किसी हाई-इंटेंसिटी गेम में होते हैं, तो हमारा शरीर ‘Fight or Flight’ मोड में चला जाता है: शरीर में एड्रेनालाईन का स्तर अचानक बढ़ जाता है| लगातार स्क्रीन और शोर से दिमाग हर समय सतर्क रहता है, जिससे दिल की धड़कन और BP बेकाबू हो जाते हैं।
गेमिंग के दौरान होने वाली ये गलतियाँ बन सकती हैं आपकी सेहत के लिए ‘रेड फ्लैग’
बिना ब्रेक के घंटों तक नॉन-स्टॉप स्क्रीन टाइम न केवल आँखों पर भारी दबाव डालता है, बल्कि मानसिक थकान को भी चरम पर पहुँचा देता है। जब हम नॉइज़ कैंसलेशन हेडफोन्स लगाकर गेम की दुनिया में खो जाते हैं, तो हम बाहरी परिवेश और अपने शरीर की बुनियादी जरूरतों, जैसे प्यास या थकान के संकेतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।
इस पर कॉम्पिटिटिव स्ट्रेस यानी हारने का डर और जीतने का पागलपन आग में घी का काम करता है, जो सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा देता है। रही-सही कसर नींद की कमी पूरी कर देती है, जिससे नसों में लगातार खिंचाव बना रहता है और शरीर को रिकवर होने का मौका नहीं मिलता यही स्थितियां अक्सर किसी बड़ी शारीरिक अनहोनी या जानलेवा खतरे को जन्म देती हैं।