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‘डिजिटल कोल्ड वॉर’ के मुहाने पर खड़ी है दुनिया? लाल सागर में स्थित ऑप्टिक फाइबर केबल कटने से उठे सवाल!

पिछले कुछ दिनों से बार बार आपकी कॉल ड्राप हो रही है, आपके इंटरनेट की स्पीड कम हो रही है. आमतौर पर इसे सामान्य घटनाएं माना जाता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. क्योंकि समंदर की गहराइयों में कुछ ऐसी घटनाएं हो रही है जो जमीन पर चिंता की वजह बन रही हैं. हाल ही में लाल सागर के भीतर इंटरनेट के ऑप्टिक फाइबर केबल कटने की घटना ऐसी ही एक बड़ी वजह है.

जिसका पहला असर इंटरनेट ट्रैफिक पर पड़ा. माइक्रोसॉफ्ट ने आगाह किया है कि इस तरह की घटना से दुनिया के 17% वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक और एशिया के लगभग 25% इंटरनेट पर गंभीर असर पड़ सकता है. यूरोप औऱ एशिया के बीच इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट का एक बड़ा हिस्सा जो लाल सागर के भीतर स्थित इन्ही केबल के जरिए गुजरता है. हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसके पीछे किसी साजिश की भी आशंका जता रहे हैं.

पहले ही दे दी गई थी चेतावनी

गार्जियन न्यूज़ ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आने वाले समय में चीन और रूस जैसी महाशक्तियां सबमरीन के जरिए समुद्री इंटरनेट केबल्स को निशाना बना सकती हैं. इस चेतावनी के पीछे चल रही मौजूदा वैश्विक तनाव को आधार माना गया था. तो क्या समंदर में चल रही इन गतिविधियों को नये युद्ध की आहट माना जाए.

क्यों महत्वपूर्ण हैं सबमरीन केबल्स?

आज की तारीख़ में दुनिया भर में 550 से अधिक सक्रिय सबमरीन फाइबर ऑप्टिक केबल्स मौजूद हैं. इनकी कुल लंबाई लगभग 14 से 15 लाख किमी के बीच मानी जाती है. यदि इन केबल्स की लंबाई को जोड़ दिया जाए, तो यह पृथ्वी के भूमध्य रेखा को 35 बार से भी ज्यादा घेर सकती है. यही केबल्स हैं जो महाद्वीपों, देशों और शहरों को अदृश्य धमनियों की तरह जोड़कर इंटरनेट मुहैया कराती हैं.

क्या क्या जताई जा रही हैं आशंकाएं?

अमेरिका या चीन, रूस और नाटो जैसे वैश्विक तनाव के चलते इन केबल्स को रणनीतिक लक्ष्य बनाया जा सकता है. क्योंकि एक केबल टूटने या कटने से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन, क्लाउड सर्विसेज और वीडियो स्ट्रीमिंग तक प्रभावित हो सकती है. 5G, AI और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें सीधे-सीधे इन्ही सबमरीन केबल्स पर निर्भर होती हैं.

वैसे ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि पानी के बड़े जहाजों के एंकर से भी ये केबल कट सकते हैं. लेकिन अभी स्थापित रूप से लाल सागर के केबल कटने की जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि सैटेलाइट युद्ध के बाद अब डिजिटल कोल्ड वॉर की तरफ दुनिया बढ़ रही है. सैटेलाइट युद्ध की चर्चा ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर तेज हुई है जिसमें ये कहा जा रहा है कि चीन ने पाकिस्तान की अदृश्य मदद की थी.

news desk

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