नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े आंदोलन के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देना अब देश की प्रांतीय राजनीति में एक नया राजनीतिक बेंचमार्क बन गया है।
केंद्र में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद, अब तीन प्रमुख राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पंजाब में विपक्ष ने ‘नैतिक जिम्मेदारी’ (Moral Responsibility) का हवाला देकर स्थानीय शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
केंद्रीय स्तर पर सेट हुए इस नए राजनीतिक मानदंड ने राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।
आंध्र प्रदेश में YSRCP चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने जिला चयन समिति (DSC) भर्ती परीक्षा में कथित धांधली को लेकर शिक्षा मंत्री नारा लोकेश पर तीखा हमला बोला है:
तेलंगाना में शिक्षा विभाग का प्रभार खुद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के पास है। राज्य में बीजेपी (BJP) ने सीएम रेवंत से सीधे शिक्षा मंत्री पद से हटने की मांग की है:
पंजाब में फार्मेसी परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर बीजेपी नेता और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के दोहरे रवैये पर हमला बोला है:
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने न केवल केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे को बदला है, बल्कि अब राज्य सरकारों के लिए भी परीक्षा लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आंखें मूंदना मुश्किल कर दिया है। विपक्ष अब हर प्रांतीय गड़बड़ी को केंद्रीय इस्तीफे के उदाहरण से जोड़कर राजनीतिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
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