नई दिल्ली: विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च की कई तस्वीरें चर्चा में रहीं, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां उस तस्वीर ने बटोरी जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और छात्र नेता नेहा बोरा एक साथ नजर आए। भीड़ के बीच राहुल गांधी कई बार नेहा बोरा और प्रियंका गांधी के लिए रास्ता बनाते दिखाई दिए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि छात्र राजनीति से निकला यह चेहरा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इतना करीब नजर आ रहा है।
12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा एक साथ मार्च करते दिखे। सामने आए वीडियो में भीड़ के बीच राहुल गांधी कई बार नेहा बोरा और प्रियंका गांधी को आगे बढ़ने के लिए रास्ता बनाते नजर आए। इसी तस्वीर के बाद राजनीतिक हलकों में नेहा बोरा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गईं।
नेहा बोरा हाल के दिनों में छात्र आंदोलनों के कारण लगातार चर्चा में रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें अब तक 9 बार हिरासत में लिया जा चुका है। हाल ही में हुए आंदोलन के दौरान भी उन्हें 24 घंटे के भीतर दो बार हिरासत में लिया गया था। इन्हीं घटनाओं के बाद उनका नाम राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बना।
नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह संगठन वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़ा माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट मार्च में उनकी मौजूदगी को छात्र संगठनों की भागीदारी के रूप में देखा गया। मार्च में जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, वहीं नेहा बोरा छात्र आंदोलन की आवाज के तौर पर शामिल थीं।
राहुल गांधी और नेहा बोरा की साथ वाली तस्वीर सामने आने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई कि क्या भविष्य में नेहा बोरा कांग्रेस का हिस्सा बन सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में न तो कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही नेहा बोरा ने ऐसी किसी संभावना की पुष्टि की है। फिलहाल यह केवल राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों का विषय बना हुआ है।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े मामले, कथित ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं, जबकि इन आरोपों पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर बहस जारी है। मार्च के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग भी की थी।
सुप्रीम कोर्ट मार्च का मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोप थे, लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा की साथ चलती तस्वीर ने अलग ही राजनीतिक संदेश दिया। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ छात्र राजनीति के एक चेहरे की मौजूदगी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि आने वाले समय में विपक्ष की राजनीति में नेहा बोरा की भूमिका कितनी बड़ी हो सकती है। फिलहाल इसका जवाब भविष्य की राजनीति ही देगी।
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