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परिसीमन बिल 2026: तमिलनाडु को 59, केरल को 30 सीटें… फिर भी दक्षिण में इतना विरोध क्यों?

news desk
Last updated: April 16, 2026 3:26 pm
news desk
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परिसीमन बिल 2026 के खिलाफ दक्षिण भारत में विरोध, तमिलनाडु और केरल सीट बढ़ोतरी के बावजूद विवाद
परिसीमन बिल पर दक्षिण भारत में बढ़ा राजनीतिक टकराव
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नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026: संसद के विशेष सत्र में पेश परिसीमन विधेयक 2026 और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता को लेकर आज बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि दक्षिण भारत के किसी भी राज्य का मौजूदा अनुपात कम नहीं होगा और सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी की जाएगी, ताकि वर्तमान प्रतिनिधित्व संतुलन बना रहे। इसी प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 करने का प्लान है, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

Contents
सरकार का 50% फॉर्मूला क्या है?विपक्ष का पलटवार: ‘दक्षिण के साथ ऐतिहासिक अन्याय’2029 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा

सरकार के मुताबिक राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें प्रस्तावित हैं। BJP सांसद Tejasvi Surya ने लोकसभा में कहा कि यह फॉर्मूला खास तौर पर दक्षिण भारत के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है। उनके मुताबिक तमिलनाडु 39 से 59, केरल 20 से 30, कर्नाटक 28 से 42, आंध्र प्रदेश 25 से 37-38 और तेलंगाना 17 से 25-26 सीटों तक पहुंच सकता है। उन्होंने दावा किया कि दक्षिणी राज्यों का कुल अनुपात 23.9% पहले था और आगे भी लगभग उतना ही रहेगा।

सरकार का 50% फॉर्मूला क्या है?

सरकार का कहना है कि अगर सिर्फ 2011 या 2027 जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता तो दक्षिणी राज्यों की सीटें घट सकती थीं, क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि दर अपेाकृत कम रही है। इसी चिंता को दूर करने के लिए “सभी राज्यों में 50% सीट बढ़ोतरी” का मॉडल लाया गया है। इससे उत्तर और दक्षिण के बीच मौजूदा राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

गृह मंत्री Amit Shah ने भी भरोसा दिलाया कि किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और यह मॉडल “समानुपातिक न्याय” पर आधारित है। सरकार का तर्क है कि यह फॉर्मूला महिला आरक्षण को 2029 चुनाव से लागू करने का रास्ता भी आसान करेगा।

विपक्ष का पलटवार: ‘दक्षिण के साथ ऐतिहासिक अन्याय’

वहीं विपक्ष ने सरकार के इस दावे को “भ्रम और षड्यंत्र” करार दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने बिल की प्रति जलाकर विरोध जताया और कहा कि यह दक्षिण भारत को जनसंख्या नियंत्रण की सजा देने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार पीछे नहीं हटी तो बड़ा जनआंदोलन होगा।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दक्षिणी राज्यों को एकजुट होने की अपील की है। वहीं कांग्रेस नेता P. Chidambaram ने कहा कि 50% बढ़ोतरी सिर्फ एक “optical formula” है, जबकि असली परिसीमन के बाद दक्षिण का कुल अनुपात घट सकता है। विपक्ष का कहना है कि इससे उत्तर भारत के ज्यादा आबादी वाले राज्यों को राजनीतिक फायदा मिलेगा।

2029 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा

यह मुद्दा सिर्फ सीटों के गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 के राज्य चुनावों और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक narrative बनता दिख रहा है। सरकार इसे महिला आरक्षण और संतुलित परिसीमन का पैकेज बता रही है, जबकि विपक्ष इसे संघीय ढांचे और दक्षिण की राजनीतिक ताकत पर असर वाला मुद्दा बना रहा है।

कुल मिलाकर, संसद के विशेष सत्र में यह बिल आने वाले दिनों में उत्तर बनाम दक्षिण राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार 50% सीट बढ़ोतरी के फॉर्मूले को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को कितनी मजबूती से जवाब देती है।

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