दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर हेल्थ इमरजेंसी बन चुका है। हाल ही में जारी ‘वाइटल स्टैटिस्टिक्स’ (MCD) की रिपोर्ट ने दिल्लीवासियों को डरा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में सांस और दिल की बीमारियों ने दिल्ली में मौतों के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
9,000 से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान
दिल्ली के आसमान पर छाई धुंध अब फेफड़ों को सीधे निशाना बना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में रेस्पिरेटरी डिजीजेज यानि (श्वसन तंत्र की बीमारियों) के कारण लगभग 9,211 लोगों की मौत हुई। 2023 में ये आंकड़ा 8,801 थी। डॉक्टरों का कहना है कि साल के अधिकांश समय AQI का स्तर 300-400 के पार रहना अस्थमा, COPD और निमोनिया जैसी बीमारियों को लाइलाज बना रहा है।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू दिल की बीमारियों से होने वाली मौतें हैं। दिल्ली में दिल की बीमारी से जुड़ी मौतों में 35% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है: 2024 में होने वाली मौतों के कुल आकड़े है 21,262 और 2023 में मौतों के आकड़े 15,714 है|
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, पीएम 2.5 (PM 2.5) के बारीक कण खून में घुलकर नसों में ब्लॉकेज और सूजन पैदा कर रहे हैं, जिससे कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।
संक्रामक रोगों पर कण्ट्रोल, पर कुल मौतें बढ़ीं
राहत की बात सिर्फ इतनी है कि दिल्ली ने संक्रामक बीमारियों के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन किया है। इनसे होने वाली मौतें 20,781 से घटकर 16,060 रह गई हैं। हालांकि, इसके बावजूद दिल्ली में कुल मौतों का ग्राफ ऊपर गया है। 2024 में कुल 1,39,480 मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले साल के 1.32 लाख के मुकाबले करीब 7,000 अधिक हैं।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिल्ली अब एक ऐसी स्थिति में है जहां सिर्फ मास्क या एयर प्यूरीफायर काफी नहीं हैं। जब तक वायु प्रदूषण को लेकर जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव नहीं होंगे, ये आंकड़े साल-दर-साल बढ़ते रहेंगे। प्रदूषण अब ‘लाइफस्टाइल डिजीज’ के साथ मिलकर एक ख़तरनाक कॉम्बिनेशन बन चुका है|