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मद्रास हाईकोर्ट ने क्रिप्टो को दिया ‘संपत्ति’ का दर्जा! — क्रिप्टो निवेशकों में उत्साह

चेन्नई: भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक बड़ा अपडेट आया है. मद्रास हाईकोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी को “संपत्ति” (Property) माना जा सकता है. यानी अब बिटकॉइन, ईथर या XRP जैसे डिजिटल कॉइन्स सिर्फ “डिजिटल नंबर” नहीं बल्कि एक वैल्यू वाली चीज़ होंगी — जिन्हें आप अपनी संपत्ति की तरह रख सकते हैं, ट्रांसफर कर सकते हैं या गिफ्ट भी दे सकते हैं.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वजीरएक्स (WazirX) क्रिप्टो एक्सचेंज और इसके ऑपरेटर ज़नमई लैब्स से जुड़ा है. जुलाई 2024 में वजीरएक्स पर एक साइबर हमला हुआ, जिसमें लगभग 235 मिलियन डॉलर (करीब 1,970 करोड़ रुपये) की डिजिटल एसेट्स चुरा ली गईं. इसके बाद एक्सचेंज ने सिंगापुर में पुनर्गठन योजना पेश की, जिसमें सभी निवेशकों पर नुकसान बांटने के लिए हेयरकट (कटौती) लगाने का प्रस्ताव था. यह योजना सिंगापुर की अदालत से मंजूर हो गई.
एक भारतीय निवेशक, जो वजीरएक्स पर 3,532.30 XRP कॉइन्स रखे हुए थीं, ने इस योजना को चुनौती दी. उनका तर्क था कि उनके कॉइन्स हैक से प्रभावित नहीं हुए थे, इसलिए उन्हें नुकसान के बोझ में हिस्सा नहीं देना चाहिए. हालांकि सिंगापुर में आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) से मामला सुलझ गया, लेकिन निवेशक ने भारत में अंतरिम सुरक्षा की मांग की.

मुख्य कानूनी निष्कर्ष

हाईकोर्ट के जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश ने फैसले में कहा- क्रिप्टोकरेंसी न तो भौतिक संपत्ति (टैंगिबल प्रॉपर्टी) है और न ही मुद्रा (करेंसी), लेकिन इसे संपत्ति माना जा सकता है. यह पहचान योग्य (आइडेंटिफायेबल), हस्तांतरणीय (ट्रांसफरेबल) और प्राइवेट कीज़ के माध्यम से विशेष नियंत्रण वाली है. निवेशक इसे एन्जॉय (उपभोग) कर सकते हैं, लाभ के रूप में रख सकते हैं और ट्रस्ट में रख सकते हैं.
एक्सचेंज सभी यूजर्स के होल्डिंग्स को एक पूल (पूल्ड एसेट) मानकर नुकसान नहीं बांट सकता. निवेशक के होल्डिंग्स अलग-अलग संपत्ति हैं. मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) संस्थाओं पर फिड्यूशरी ड्यूटी (विश्वासपूर्ण जिम्मेदारी) है, और वे खुद को सिर्फ सुविधा प्रदाता कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते. कोर्ट ने निवेशक को बैंक गारंटी के माध्यम से सुरक्षा दी, लेकिन यह फैसला अंतरिम है और आगे अपील का सामना कर सकता है.

क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति मानने का मतलब

क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति मानने का मतलब यह है कि अब इसे अन्य संपत्तियों की तरह कानूनी रूप से मान्यता मिलेगी, यानी इसे वसीयत, उत्तराधिकार और उपहार में शामिल किया जा सकेगा, जिससे एस्टेट प्लानिंग और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग आसान होगी. हालांकि, यह क्रिप्टो को मुद्रा या सिक्योरिटी का दर्जा नहीं देता और यूटिलिटी टोकन व स्टेबलकॉइन्स जैसे टोकनों की स्थिति अभी भी अस्पष्ट है क्योंकि रेगुलेशन की कमी बनी हुई है.

news desk

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