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क्रूड ने फिर बढ़ाई टेंशन! 100 डॉलर के पार पहुंचा तेल, वेस्ट एशिया के तनाव से पेट्रोल-डीजल पर बढ़ेगा दबाव?

नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल आया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब तीन महीने में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने सप्लाई बाधित होने की आशंका को फिर बढ़ा दिया है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.3 प्रतिशत चढ़कर 0614 GMT तक 99.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.2 प्रतिशत बढ़कर 94.13 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ताजा तेजी के साथ ब्रेंट क्रूड जुलाई में देखे गए स्तरों के करीब पहुंच गया है।

अगस्त से करीब 25 फीसदी चढ़ा ब्रेंट क्रूड

अगस्त की शुरुआत से ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 25 प्रतिशत बढ़ चुकी है। छह महीने से जारी युद्ध के स्थायी समाधान की उम्मीद कमजोर पड़ने और संघर्ष दोबारा तेज होने से तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।

करीब तीन महीने बाद ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचना उन देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल पर निर्भर हैं।

वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से क्यों उछला तेल?

कच्चे तेल में ताजा तेजी की बड़ी वजह वेस्ट एशिया में बढ़ता संघर्ष है। मंगलवार को यमन में ईरान समर्थित हूती बलों ने सऊदी अरब के कई शहरों पर हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब के संघर्ष में और गहराई से शामिल होने की आशंका बढ़ गई है।

इस घटनाक्रम ने सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और पूरे क्षेत्र से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले अमेरिका ने कई ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था। वहीं, ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया और जहाजों पर भी हमले किए।

सप्लाई बाधित हुई तो बढ़ सकती है मुश्किल

तेल बाजार की चिंता अब किसी एक उत्पादन केंद्र या सुविधा तक सीमित नहीं है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल के परिवहन मार्गों और रणनीतिक जलमार्गों से होने वाली कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में लंबे समय तक सप्लाई बाधित होने का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड फिर मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ रहा है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?

अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इससे ऊर्जा लागत बढ़ सकती है। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

हालांकि, पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों पर असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रूड के भाव से तय नहीं होता। फिलहाल बाजार की नजर वेस्ट एशिया में आगे होने वाले घटनाक्रम और कच्चे तेल की सप्लाई पर बनी हुई है।

vineet verma

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