तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को गंभीर संकट के केंद्र में ला दिया है। यहां व्यापारिक जहाजों पर हमलों, ड्रोन निगरानी और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाए जाने के खतरे के बीच जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित हो गई है। एक ओर अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कूटनीतिक और सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर गाजा और लाल सागर में जारी तनाव ने पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।
समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस की ताजा रिपोर्ट ने हालात को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। एजेंसी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा का खतरा गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात के एक तेल टैंकर पर हमले के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या घटकर इकाई के आंकड़े यानी सिंगल डिजिट तक पहुंच गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स समुद्री क्षेत्र में लगातार सक्रिय नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्यिक जहाजों को रेडियो के जरिए चेतावनी दी जा रही है और उनकी निगरानी के लिए टोही ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं। समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाए जाने की आशंका ने भी जहाजों की आवाजाही को जोखिम भरा बना दिया है।
ओमान के दक्षिणी तटीय इलाकों लीमाह, खासाब और कुमजार के आसपास लगातार धमाकों और मिसाइल हमलों की खबरों ने हालात को और गंभीर कर दिया है। इससे दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात लगभग ठहर गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा संपर्क को लेकर स्पष्ट किया है कि बातचीत सीमित स्तर पर है। अमेरिकी रणनीति का प्रमुख उद्देश्य ईरान पर आर्थिक और अन्य दबाव बढ़ाना है, ताकि तेहरान को अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर किया जा सके।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हालांकि अमेरिका के साथ सीधे बातचीत होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि कुछ मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। अराघची ने ओमान के साथ चल रहे संपर्क का भी जिक्र किया।
ईरानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं होती और ईरान की मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक होर्मुज में समुद्री आवाजाही सामान्य होने की संभावना नहीं है।
ईरान के सत्ता तंत्र में भी अहम बदलाव हुआ है। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अपना विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है।
रक्षा मामलों के जानकार इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनके मुताबिक, देश की शीर्ष सुरक्षा व्यवस्था में पूर्व सैन्य कमांडर को अहम भूमिका देना संकेत देता है कि तेहरान मौजूदा संकट के बीच सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को प्राथमिकता दे रहा है।
पश्चिम एशिया का संकट केवल होर्मुज और ईरान तक सीमित नहीं है। गाजा में युद्ध को लेकर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की मध्यस्थता वाले गाजा शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हमास का पूरी तरह निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक इस्राइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इस्राइल के इस रुख से गाजा में संघर्ष खत्म करने की कोशिशों को झटका लगा है और क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इसका सीधा असर तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। मौजूदा हालात में जहाजों पर हमलों, ड्रोन निगरानी और बारूदी सुरंगों के खतरे ने समुद्री परिवहन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, होर्मुज में समुद्री गतिरोध और गाजा में जारी संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां किसी भी नए सैन्य घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
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