कोरोना वैरिएंट Cicada BA.3.2
नई दिल्ली: कोविड-19 का एक नया ओमिक्रॉन सबवैरिएंट BA.3.2, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘Cicada’ कहा जा रहा है, दुनिया के कई देशों में तेजी से फैलता दिख रहा है। यह वैरिएंट अपने स्पाइक प्रोटीन में करीब 70-75 म्यूटेशन्स के कारण चर्चा में है, जिससे यह पहले हुए संक्रमण या मौजूदा वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी को कुछ हद तक चकमा दे सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “Variant Under Monitoring” की सूची में रखा है, यानी फिलहाल इस पर करीबी नजर रखी जा रही है, लेकिन इसे अभी ज्यादा खतरनाक कैटेगरी में नहीं रखा गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक BA.3.2 पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया था और लंबे समय तक कम सक्रिय रहने के बाद अब फिर से उभर कर सामने आया है। फरवरी 2026 तक यह कम से कम 23 देशों में पाया जा चुका है। अमेरिका में इसे 25 राज्यों के वेस्टवॉटर सैंपल्स और कई क्लिनिकल केस में डिटेक्ट किया गया है, जबकि यूरोप के कुछ देशों में इसकी हिस्सेदारी 30% तक पहुंचने की बात सामने आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए वैरिएंट के लक्षण बाकी ओमिक्रॉन स्ट्रेन्स जैसे ही हैं। सबसे कॉमन लक्षणों में खांसी, गले में खराश (कभी-कभी तेज दर्द), बुखार, थकान, नाक बंद या बहना, सिरदर्द, शरीर दर्द और स्वाद या गंध कम होना शामिल हैं। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि यह पहले के वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी या मौत का कारण बन रहा है। ज्यादातर केस हल्के से मध्यम पाए गए हैं।
लैब स्टडीज में यह जरूर सामने आया है कि BA.3.2 कुछ हद तक एंटीबॉडीज से बच निकल सकता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अपडेटेड बूस्टर डोज अभी भी गंभीर बीमारी से बचाने में काफी मददगार हैं। भारत में अभी इस वैरिएंट से जुड़े किसी बड़े केस स्पाइक की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय, ICMR और जीनोमिक सर्विलांस एजेंसियां लगातार नए वैरिएंट्स पर नजर रखे हुए हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन भीड़भाड़ में मास्क, हाथों की सफाई और लक्षण होने पर तुरंत टेस्ट जैसी सावधानियां फिर से अहम हो गई हैं।
फिलहाल एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि panic नहीं, precaution जरूरी है। अगर आपको सर्दी, खांसी, बुखार या गले में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो खुद को आइसोलेट करें, टेस्ट कराएं और डॉक्टर की सलाह लें। कोविड भले अब पहले जैसा बड़ा खतरा न लगे, लेकिन वायरस लगातार बदल रहा है—और यही वजह है कि जागरूकता अभी भी सबसे बड़ा बचाव है।
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