नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वजह है 2026 के द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव। इस बार कुल 37 सीटें खाली हो रही हैं और मतदान 16 मार्च 2026 को होगा। चुनाव आयोग ने 18 फरवरी 2026 को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी थी। अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर इन सांसदों का कार्यकाल खत्म होगा। महाराष्ट्र (7), तमिलनाडु (6), बिहार (5), ओडिशा (4), तेलंगाना (3), पश्चिम बंगाल (3), असम (3), छत्तीसगढ़ (2), हरियाणा (2) और हिमाचल प्रदेश (1) में चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस अपनी पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
पवन खेड़ा से लेकर जीतू पटवारी तक, नामों की लंबी लिस्ट
कांग्रेस के तेजतर्रार प्रवक्ता Pawan Khera का नाम हरियाणा या हिमाचल प्रदेश से लगभग तय माना जा रहा है। हरियाणा में पार्टी की स्थिति मजबूत है और दो सीटें खाली हो रही हैं। खेड़ा भाजपा पर हमलावर अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें “फायरब्रांड” नेता कहा जा रहा है।
मध्य प्रदेश से Jitu Patwari का नाम चर्चा में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर वे संगठन को मजबूती देने में लगे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने इस बार राज्यसभा न लड़ने का संकेत देकर युवाओं के लिए रास्ता खोल दिया है।
दलित और आदिवासी प्रतिनिधित्व पर भी फोकस है। Rahul Gandhi की सामाजिक न्याय लाइन को आगे बढ़ाने के लिए नए चेहरे लाने की तैयारी है। दिल्ली के पूर्व मंत्री Rajendra Pal Gautam का नाम भी दलित फ्रंट मजबूत करने के लिए उछल रहा है। वहीं किसान नेता Yogendra Yadav का नाम आया जरूर, लेकिन फिलहाल चर्चा ठंडी पड़ गई है।
बघेल और सिंघवी की मजबूत दावेदारी
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel दो सीटों में से एक के बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी पकड़ किसान और आदिवासी मुद्दों पर मजबूत है।
तेलंगाना से वरिष्ठ नेता Abhishek Manu Singhvi की वापसी लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि वहां कांग्रेस की सरकार है।
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की सीट भी सुरक्षित मानी जा रही है, जिससे पार्टी नेतृत्व का संदेश साफ रहेगा।
क्या है कांग्रेस की बड़ी रणनीति?
कांग्रेस की कोशिश है कि युवा, मुखर और सामाजिक प्रतिनिधित्व वाले चेहरों को आगे लाया जाए। पार्टी को उम्मीद है कि विधानसभा की मौजूदा ताकत के आधार पर वह 10–12 सीटें जीत सकती है। नामांकन 5 मार्च तक होंगे और 16 मार्च को तस्वीर साफ हो जाएगी।
कुल मिलाकर, ये चुनाव सिर्फ राज्यसभा की सीटों का खेल नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस के भविष्य की दिशा तय करने वाले भी साबित हो सकते हैं।