उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप के तस्करी सिंडिकेट से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है. इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. यूपी पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का संचालनकर्ता माने जा रहे बर्खास्त सिपाही अलोक प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. एसटीएफ ने आलोक सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया है. सूत्रों की माने तो आलोक सिंह ने लखनऊ कोर्ट में सरेंडर की अर्जी डाली हुई थी. आलोक सिंह का नाम सोना लूट कांड में आया था. जिसके बाद उसे बर्खास्त किया गया था.
STF की जांच में सामने आया है कि अलोक प्रताप सिंह इस ₹100 करोड़ से अधिक वाले रैकेट का अहम हिस्सा था, जिसका नेटवर्क यूपी-बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ है.
यह वही रैकेट है जिसके तहत कोडीन-मिश्रित कफ सिरप को अवैध रूप से पश्चिम बंगाल की सीमा से बांग्लादेश तक भेजा जा रहा था. इस मामले में वाराणसी और सोनभद्र में एफआईआर दर्ज है. इसी कड़ी में STF पहले ही अमित सिंह टाटा को लखनऊ से गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि सोनभद्र पुलिस ने वाराणसी निवासी शुभम जयसवाल के पिता, भोला प्रसाद, को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था.
कौन है आलोक प्रताप सिंह ?
आलोक प्रताप सिंह ड्रग सिंडिकेट को चलाने वाला मुख्य आरोपी है. ये यूपी पुलिस में सिपाही था सोने की लूटकांड में नाम आने के बाद इसे बर्खाश्त कर दिया गया था. सोशल मीडिया पर इसका करीबी सम्बन्ध धनंजय सिंह से भी जोड़ा जा रहा है. बताया जा रहा है इसका वोटर कार्ड धनंजय सिंह के घर से ही रजिस्टर है. इस ड्रग सिंडिकेट के एक अन्य आरोपी अमित सिंह टाटा ने पूछताछ में आलोक सिंह का नाम लिया था.
अखिलेश यादव का बड़ा हमला — “इंटरपोल खोलेगा पोल”
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“माफ़ियाजीवी भ्रष्ट भाजपाइयों का नया इंटरनेशनल वर्जन देखा क्या? अब इंटरपोल ही भाजपाइयों की पोल खोलेगा.”
अखिलेश यादव लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड एक बाहुबली है और उसे बचाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि STF की कार्रवाई सिर्फ छोटे-छोटे खिलाड़ियों पर हो रही है, जबकि असली चेहरा अभी सामने नहीं लाया जा रहा.
यह नेटवर्क अक्टूबर में तब सामने आया था, जब सोनभद्र के चुर्क लाइन मोड़ पर चेकिंग के दौरान लगभग 20,000 कफ सिरप की बोतलें पकड़ी गईं. जांच आगे बढ़ी तो खुलासा हुआ कि शुभम का गिरोह कफ सिरप को कभी पेंट की बाल्टियों में, कभी नमकीन पैकेटों के बीच, तो कभी छोटे कैरियरों और साइकिलों के जरिए कई राज्यों में तस्करी करता था.
यह मामला न सिर्फ स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर खतरे की घंटी है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनकर खड़ा है. STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने इस काले कारोबार की परतें भले खोल दी हों, लेकिन मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल अभी भी गिरफ्त से बाहर है जिसके गिरफ्तार होने के बाद कई बड़े नाम भी इस केस से जुड़ सकते हैं.