अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें घर में फिनाइल की खुशबू आते ही ‘सुकून’ मिलता है, तो थोड़ा रुकिए। जिस चमकते फर्श को देखकर आप खुश हो रहे हैं, वो असल में आपके फेफड़ों को 20 सिगरेट जितना डैमेज कर रहा है।
सफाई नहीं, ये तो ‘केमिकल लोचा’ है!
हालिया रिपोर्ट्स ने एक ऐसी सच्चाई सामने रखी है जो आपके होश उड़ा देगी। घर चमकाने वाले महंगे स्प्रे और लिक्विड्स असल में ‘साइलेंट किलर्स’ साबित हो रहे हैं। रिसर्च कहती है कि जो लोग हर वक्त सफाई के रसायनों के बीच रहते हैं, उनके फेफड़ों की हालत एक चेन स्मोकर जैसी हो जाती है।
क्यों है ये ‘टॉक्सिक’ रिलेशनशिप?
बाजार में मिलने वाले क्लीनर्स सिर्फ दाग नहीं हटाते, बल्कि ये तोहफे भी देते हैं: स्प्रे की बारीक बूंदें सीधे फेफड़ों में घुसकर उन्हें अंदर से ‘जला’ देती हैं। खतरनाक एसिड्स आपकी सॉफ्ट स्किन को रूखा और एलर्जी वाली बना देते हैं और इन क्लीनर्स से निकलने वाले ‘VOCs’ आपके घर की हवा को दिल्ली के स्मॉग से भी ज्यादा जहरीला बना सकते हैं।
तो क्या अब सफाई छोड़ दें?
एक्सपर्ट्स का कहना है की बिलकुल नहीं! बस अपने सफाई के स्टाइल को थोडा ‘अपग्रेड’ करने की जरूरत है।
अगर क्लीनर की बोतल पर लगे लेबल को पढ़कर आपको केमिस्ट्री की लैब याद आ रही है, तो समझ जाइये कि वो आपके लिए नहीं है। और उसके बजाए आप कुछ घरेलु नुस्खे अपनाए जैसे:
सिरका (Vinegar) और बेकिंग सोडा पुराने हो सकते हैं, लेकिन ये आज भी ‘गोल्ड’ है इसे उसे करने से कोई साइड इफेक्ट्स नही होता है|
और अगर केमिकल प्रोडक्ट्स यूज करना आपकी मजबूरी है, तो उसे करते समय मास्क लगाकर करें। सफाई करते वक्त खिड़कियां खोलें, ताकि जहरीली गैसेस बाहर निकलें, न कि आपके फेफड़ों में। और एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा की स्प्रे गन का मोह छोड़ें और लिक्विड को सीधे कपड़े पर डालकर पोंछा लगाएं। घर को अस्पताल जैसा चमकाने के चक्कर में खुद को अस्पताल न पहुँचाएँ। सस्टेनेबल और सुरक्षित क्लीनिंग ही असली ‘Life Hack’ है।