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बिहार चुनाव से पहले एनडीए में खींचतान! चिराग पासवान की सीटों पर ज़िद से बिगड़ा समीकरण…अमित शाह-नीतीश की बैठक भी न निकाल पाई हल

बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही सत्ताधारी एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज़ हो गई है. कई नेता अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन हक़ीक़त यह है कि किसी को भी पक्का विश्वास नहीं है कि इस बार किसे टिकट मिलेगा किसे नहीं. यही वजह है कि जब प्रदेश में दुर्गा पूजा का माहौल बन रहा है, तब नेता जनता के बीच जाने के बजाय उम्मीदवार बनने की जुगत में पटना और दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं.

सीटों के गणित बिठाने में पेंच बने चिराग पासवान

नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए में इस समय सीटों की संख्या के साथ-साथ सीटों की “क्वालिटी” यानी जीतने योग्य और मुश्किल सीटों को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है, जिसकी सबसे बड़ी वजह बने हैं चिराग पासवान.

सूत्र के मुताबिक, एनडीए में सबसे बड़ा पेच चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को लेकर है. वह किसी भी हालत में 30 सीट से कम पर तैयार नहीं दिख रहे हैं और 2020 में जीती कई सीटों पर भी दावा ठोक रहे हैं. उनकी यही जिद गठबंधन की सारी बातचीत को अटका रही है.

झुकने को तैयार नहीं चिराग

वहीं बीजेपी और जेडीयू उन्हें 20-22 सीटों के अलावा राज्यसभा और विधान परिषद की सीटें ऑफर कर समझौते पर लाने की कोशिश में हैं. लेकिन चिराग झुकने को तैयार नहीं दिख रहे.
चिराग की मुश्किल यह भी है कि उनकी पार्टी में इतने दावेदार हैं कि 30 सीट मिलने पर भी कई को निराश होना पड़ सकता है, इसके साथ ही टिकट वितरण के समय बगावत की आशंका भी बनी रह सकती है.

गतिरोध को सुलझाने के लिए अमित शाह और नीतीश ने की थी पिछले दिनों बैठक

इसी गतिरोध को सुलझाने के लिए कुछ दिनों पहले पटना में अमित शाह और नीतीश कुमार की अहम बैठक भी हुई थी, जिसमें यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था. हालांकि यह भी सामने आया था कि जेडीयू इस समय सीधे किसी सहयोगी से बात करने से बच रही है और सारी बातचीत बीजेपी के जरिए हो रही है.

क्या है बीजेपी की मुश्किल ?

इसी बीच, बीजेपी के सामने भी बड़ी मुश्किल है क्योंकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी-अपनी मांगों पर अड़ चुके हैं. जहां मांझी 15 सीटें न मिलने पर अलग चुनाव लड़ने की चेतावनी दे चुके हैं, वहीं कुशवाहा ने गठबंधन को चेताया है कि लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी ‘सेल्फ गोल’ हो सकता है.

लेकिन सबसे बड़ा पेच फिलहाल चिराग पासवान ही बने हुए हैं, जिनकी सीटों पर जिद ने एनडीए की तस्वीर साफ होने से रोकी हुई है.

news desk

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