बीते शुक्रवार को अमेरिका द्वारा चीन से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले के बाद अब बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रविवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका पर “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक व्यापार सिद्धांतों के खिलाफ है और द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है.
अमेरिका पर बरसा चीन
मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘अमेरिका बार-बार मुक्त व्यापार की बात करता है, लेकिन खुद संरक्षणवादी नीतियां लागू करता है. यह तथाकथित दोहरे मानदंडों का साफ उदाहरण है.’
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस कदम को ‘दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता के माहौल को कमजोर करने वाला’ बताते हुए कहा कि ‘हर मुद्दे पर ऊंचे शुल्क लगाने की धमकी देना चीन के साथ संवाद का रचनात्मक तरीका नहीं हो सकता.’
बीजिंग ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका अपने हितों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय नियमों की व्याख्या करता है, लेकिन जब दूसरे देश उसी सिद्धांत का पालन करते हैं, तो उन्हें दोषी ठहराता है.
क्या होगा चीन का अगला कदम ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात आगामी एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन में होने वाली है. जानकारों का कहना है कि चीन की यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि बीजिंग भी अमेरिका के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कदम उठा सकता है, जिससे वैश्विक बाजार और आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो सकती हैं.
क्यों अमेरिका ने लगाया चीन पर 100 फीसदी टैरिफ ?
ट्रंप ने शुक्रवार को चीन पर 100 फीसदी टैरिफ का ऐलान करते हुए कहा था कि यह निर्णय चीन द्वारा दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के निर्यात पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के जवाब में लिया गया है.
दरअसल इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों में किया जाता है, जिनका अमेरिका के लिए खासा महत्व है. ऐसे में चीन के इस कदम से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौनों और घरेलू उपकरणों जैसे चीनी उत्पादों की कीमतें बढ़ जाएंगी.