नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का हमला और तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की हालिया टिप्पणी के बाद कांग्रेस और टीएमसी नेताओं ने CEC के इस्तीफे की मांग उठाई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का समर्थन करते हुए CEC पर तीखा हमला बोला है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रमेश ने कहा कि अगर जस्टिस भुइयां की टिप्पणी को ध्यान में रखा जाए तो CEC को पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग के नेतृत्व और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
हालांकि, जयराम रमेश के ये बयान उनके राजनीतिक आरोप और मांग हैं। इन आरोपों पर चुनाव आयोग या CEC की प्रतिक्रिया को अलग से देखना महत्वपूर्ण होगा।
दिग्विजय सिंह ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के अधिकार से जुड़े मुद्दे को उठाने के लिए जस्टिस भुइयां को बधाई दी जानी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया और उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे सार्वजनिक जीवन में चुनाव आयोग की ओर से नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं देखी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी टिप्पणी को अदालत की अवमानना माना जाता है तो वह इसके लिए कानूनी परिणाम भुगतने को तैयार हैं।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी जस्टिस भुइयां की टिप्पणी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में नागरिक अपने अधिकारों से वंचित हो जाते हैं तो उस प्रक्रिया की संवैधानिकता और उसके प्रभाव पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
घोष ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करेंगे। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी तीखी टिप्पणी की और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई।
विवाद की शुरुआत जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने वोट देने के संवैधानिक अधिकार और ऐसी प्रक्रियाओं को लेकर चिंता जताई जो बड़ी संख्या में नागरिकों को मतदान से बाहर कर सकती हैं।
हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मतदान के अधिकार को किसी प्रक्रिया या बहाने के जरिए इस तरह प्रभावित नहीं किया जा सकता कि बड़ी संख्या में लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएं।
उन्होंने ऐसी स्थिति में प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिकता पर सवाल उठने की बात कही।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग लगातार मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के लिए प्रक्रिया को जरूरी बताता रहा है।
अब जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। खास तौर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हो रही है। ऐसे में जस्टिस भुइयां की टिप्पणी और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच अब अदालत की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। हालांकि, किसी न्यायिक टिप्पणी को अंतिम न्यायिक फैसला मानना उचित नहीं होगा। SIR और चुनाव आयोग से जुड़े कानूनी सवालों पर अंतिम स्थिति अदालत के फैसले से ही स्पष्ट होगी।
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